करीब सवा साल बाद नजूल भूमि का फ्री होल्ड एक बार फिर से शुरू होगा। हालांकि इसकी कोई निश्चित तारीख तय नहीं है, लेकिन 15 फरवरी के बाद इसके शुरू होने की संभावना है।
राजधानी में नजूल की फ्री होल्ड दर करीब 8 से 10 फीसदी तक बढ़ाई जाएगी। फिलहाल डीएम सर्किल रेट के हिसाब से आवासीय क्षेत्र में 25 फीसदी फ्री होल्ड शुल्क और अनावासीय में 40 फीसदी शुल्क वसूला जाता है।
इसको अब आठ से 10 फीसदी तक बढ़ाया जाएगा। इस संबंध में सचिव आवास की अध्यक्षता में एक बैठक हो चुकी है। अगली बैठक होने के बाद में नई नजूल नीति को कैबिनेट से पास करा कर लागू कर दिया जाएगा।
पिछली नजूल नीति की मियाद दिसंबर-2012 में खत्म हो गई थी। इसके बाद में नजूल के फ्री होल्ड रुकने की वजह से एलडीए में सैकड़ों फाइलें फंसी हुई थीं। बड़े-छोटे आवासों का निर्माण इसके चलते रुका हुआ था।
यहां तक की नामंतरण की फाइलें भी आगे नहीं बढ़ाई जा रही थीं। प्रदेश में केवल लखनऊ में ही विकास प्राधिकरण के पास नजूल संपत्तियां भी हैं। बाकी सारी जगह यह भूमि डीएम क्षेत्राधिकार में होती हैं।
अब यह लगभग तय हो गया है कि अगले एक महीने से भी कम समय में नई नजूल नीति लागू हो जाएगी।
राजधानी में हजारों एकड़ नजूल लैंड
राजधानी में ऐसी हजारों एकड़ नजूल लैंड है, जिस पर लोग बसे हुए हैं। नियम के मुताबिक पिछले 15-20 साल से बसे हुए लोगों को उसी जमीन पर वैध कब्जा देने के लिए प्राधिकरण फ्री होल्ड कर देता है।
दिसंबर-2012 तक वैध पिछली नीति के मुताबिक, आवासीय क्षेत्र में जो भी डीएम सर्किल रेट हो उसका 25 फीसदी लेकर फ्री होल्ड किया जाता रहा है। जबकि, कॉमर्शियल नजूल लैंड का फ्री होल्ड 40 फीसदी डीएम सर्किल रेट पर किया जाता था, इसको लगभग 50 फीसदी तक किया जाएगा।
एक अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में बीते रोज सचिव आवास राजीव अग्रवाल की अध्यक्षता में बैठक की गई। इसमें शासन के अनेक अधिकारियों के अलावा एलडीए से नजूल अधिकारी वीरेंद्र पांडेय मौजूद रहे।
एक और मीटिंग अगले 10 दिन में होगी। इसके बाद में नजूल नीति को कैबिनेट के समक्ष अनुमोदन के लिए प्रेषित किया जाएगा।