भगवा एजेंडे के प्रमुख हिस्से अयोध्या, मथुरा से दूरी बनाकर चल रहे नरेंद्र मोदी बनारस में बदले दिखेंगे।
वे एजेंडे के प्रमुख हिस्से काशी विश्वनाथ मंदिर (ज्ञानवापी से सटे) में माथा टेकेंगे। साथ ही संकट मोचन मंदिर भी दर्शन करने जाएंगे।
मोदी 20 दिसंबर को वाराणसी में विजय शंखनाद रैली को संबोधित करने आ रहे हैं। अब देखने वाली बात यह है कि काशी विश्वनाथ मंदिर में माथा टेकने जा रहे मोदी को इस मंदिर की मुक्ति का संकल्प याद रहता है या नहीं। वे अपने भाषण में इसका जिक्र करते हैं या नहीं।
यूपी में रैलियां शुरू करने के बाद मोदी पहली बार किसी ऐसे मंदिर में जा रहे हैं जो भगवा एजेंडे का हिस्सा है। संघ परिवार ने अयोध्या और मथुरा के साथ ही जिसकी मुक्ति का संकल्प ले रखा है।
वर्ष 1984 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व विश्व हिंदू परिषद ने जिन स्थलों को हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र करार देकर इनकी मुक्ति की मांग की थी, उनमें अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, मथुरा का श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर और वाराणसी का काशी विश्वनाथ मंदिर शामिल है।
भाजपा के सह मीडिया प्रभारी मनीष दीक्षित ने बताया कि मोदी अहमदाबाद से दोपहर 12.30 बजे वाराणसी पहुंचेंगे।
लगभग दो घंटा रैलीस्थल पर रहने के बाद वे अहमदाबाद लौट जाएंगे। इस दौरान मोदी काशी विश्वनाथ मंदिर और संकट मोचन मंदिर भी जाएंगे।
पारंपरिक मान्यता भी है एक वजह
वाराणसी से पहले यूपी में अभी तक मोदी की चार रैलियां हो चुकी हैं। किसी रैली में मोदी ने अयोध्या, मथुरा व काशी के मंदिरों का जिक्र नहीं किया है।
इसलिए अब जब उनके काशी विश्वनाथ मंदिर जाने की आधिकारिक घोषणा की जा चुकी है तो लोगों में स्वाभाविक रूप से यह उत्सुकता है कि उनके भाषण में भी कोई बदलाव दिखेगा या नहीं। हालांकि कुछ लोग इसे वाराणसी की परंपरा व मान्यता से जोड़ रहे हैं।
उनका तर्क है कि मान्यता के अनुसार काशी आने वाले के लिए वहां के कोतवाल (भैरोनाथ मंदिर) और काशी विश्वनाथ मंदिर जाना जरूरी होता है। काशी जाकर जो इन स्थानों पर नहीं जाता है, उसका संकल्प कभी पूरा नहीं होता।