लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में स्नातक में सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों की फीस में बढ़ोतरी और इस पर विरोध के बाद कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने मंगलवार को प्रेसवार्ता के जरिये फीसवृद्धि पर अपना पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए, बढ़ते खर्च और संसाधनों की जरूरत को देखते हुए केवल सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों की फीस बढ़ाई जा रही है। रेग्युलर पाठ्यक्रमों की फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। पीजी के पाठ्यक्रमों की फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। अब लविवि में शिक्षा को और आधुनिक, समसामयिक, रोजगारपरक और छात्र-केंद्रित बनाया जाएगा। जल्द ही दो गर्ल्स और एक बॉयज छात्रावास की सौगात मिलेगी।
उन्होंने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय ने नए सत्र के लिए कई रोजगारपरक पाठ्यक्रमों को खास ताैर पर डिजाइन किया गया है। कई तो ऐसे कोर्स हैं जो पूरे देश में महज कुछ संस्थानों में हैं। नए सत्र में 11 नए स्नातक, 10 स्नातकोत्तर और 22 माइनर डिग्री कार्यक्रम शुरू किए हैं। साथ ही पांच नए व्यावसायिक कोर्स भी जोड़े गए हैं। अब विद्यार्थी अपने मुख्य विषय के साथ दूसरी रुचि का माइनर कोर्स भी कर सकेंगे। प्रेसवार्ता में कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा, परीक्षा नियंत्रक विद्यानंद त्रिपाठी के साथ प्रो. अरविंद मोहन, प्रो. अनित्य गौरव, प्रो. अमिता कन्नौजिया, प्रो. मुकुल श्रीवास्तव, डॉ. गीतांजलि मिश्रा आदि मौजूद रहे।
क्लैट और कैट के जरिये भी होंगे प्रवेश
कुलपति ने कहा कि प्रवेश प्रक्रिया को भी राष्ट्रीय स्तर के अनुरूप किया जा रहा है। एलएलबी में प्रवेश अब क्लैट और एमबीए में कैट के जरिये होगा। साथ ही विभिन्न पाठ्यक्रमों में कुल 2,326 सीटें बढ़ाने का फैसला लिया गया है। परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए सभी परीक्षाएं कैमरे की निगरानी में होंगी। वहीं, ग्रेडिंग सिस्टम सुधारने के लिए एक समिति बनाई गई है।
सधे हुए अंदाज में दिए प्रश्नों के जवाब
बीते फरवरी में लविवि के कुलपति का कार्यभार संभालने के बाद प्रो. जेपी सैनी की मंगलवार को पहली प्रेसवार्ता थी। उनके पास विश्वविद्यालय में छात्रहित में लिए गए फैसलों की लंबी फेहरिस्त थी। नए पाठ्यक्रमों, नीतिगत बदलावों, नए फैसलों आदि के आंकड़ों और फैक्ट्स की पूरी तैयारी के साथ वह प्रेसवार्ता में मुखातिब हुए। कई तीखे सवालों का उन्होंने सधे हुए अंदाज में जवाब दिया।
संबद्ध कालेजों को भी करेंगे अपलिफ्ट
संबद्ध कॉलेजों के विकास पर भी जोर दिया गया है। निरीक्षण और फैकल्टी चयन की प्रक्रिया अब ऑनलाइन होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच थर्ड पार्टी से कराई जाएगी