कहते हैं हनुमानजी को जब लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी लाने भेजा गया तो उन्हें नहीं मालूम था कौनसी बूटी संजीवनी है, इसलिए वे पूरा द्रोणगिरि पर्वत ही उठा लाए।
शेयर में निवेश करने वाले नागरिकों के लिए केंद्र सरकार भी अब ऐसा ही कुछ कर रही है। मार्केट में निवेशकों को कम जोखिम में बेहतर मुनाफा मिले, इसके लिए केंद्र सरकार एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) लेकर आ रही है।
ये ईटीएफ सार्वजनिक क्षेत्र की मुनाफा दे रही विभिन्न कंपनियों के शेयर होंगे। दावा किया जा रहा है इनसे कम जोखिम पर अधिक मुनाफा मिलेगा।
इस संबंध में जानकारी देने के लिए शुक्रवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने राजधानी में एक सेमिनार का आयोजन किया।
इस मौके पर वित्त मंत्रालय के विनिवेश विभाग के संयुक्त सचिव आलोक टंडन ने सरकार की मंशा समझाई। उन्होंने कहा कि अगले 5 महीने में सरकार अपने ईटीएफ लॉन्च करेगी।
इसमें नवरत्न, महारत्न और मिनीरत्न कंपनियों में सरकारी फंड को शामिल किया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि इससे कंपनियों की कुल परिसंपत्ति पर असर नहीं होगा क्योंकि सरकार अपने शेयरों पर ईटीएफ उपलब्ध करवाएगी।
टंडन ने कहा कि भारत में ईटीएफ का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और पिछले तीन साल में इसमें करीब तीन गुना वृद्धि हुई है। इसे लोकप्रिय बनाने के लिए आईसीआईसीआई सिक्युरिटीज को सरकार का सलाहकार और गोल्डमैन असेट मैनेजमेंट कंपनी को सेवा प्रदाता बनाया गया है।
सेमिनार में इन दोनों कंपनियों के अधिकारी क्रमश: विनीत अरोड़ा और संजीव शाह सहित एनएसई के मुख्य व्यवसाय विकास अधिकारी रवि वाराणसी भी मौजूद थे। वहीं निवेशकों को भी ईटीएफ के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
खुदरा और शुरुआती खरीदारों को फायदा
टंडन ने बताया कि सरकार का ध्यान खुदरा निवेशकों पर है और उन्हें ईटीएफ इश्यू के समय यानी शुरुआती समय में निवेश करने पर 5 से 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। वहीं एक साल तक फंड को बनाए रखने पर लॉयल्टी बोनस भी दिया जाएगा।