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मुजफ्फरनगर में हिट रहा पुलिस का एस-7 और एस-10 फॉर्मूला, पूरे यूपी में है इसकी चर्चा

Fri, 20 Oct 2017 03:54 PM IST
सैयद यासिर रजा/अमर उजाला, लखनऊ
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बदलते दौर में पुलिस अपराध और कानून-व्यवस्था से निपटने के लिए नए-नए तरीके अपना रही है। कई जिलों में यह कारगर भी साबित हो रहे हैं। कहीं एस-7 और एस-10 फार्मूले से पुलिस फसाद रोकने में कामयाबी हासिल कर रही है और कहीं मुकदमा दर्ज करने से पहले होने वाली जांच से तारीफ बटोर रही है। एक जिला ऐसा भी है जहां फरियादियों की खातिरदारी गुड़ और चने से की जा रही है। ऐसे में नए तरीके की पुलिसिंग सभी को भा रही है।
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मुजफ्फरनगर: एस-7, एस-10 फार्मूले का असर
मुजफ्फरनगर एसएसपी अनंतदेव के एस-7, एस-10 फार्मूले से वहां अपराध और आपसी विवाद के मामले काफी कम हो गए हैं। साथ ही पुलिस और पब्लिक के बीच की दूरी भी घट गई। अनंत देव बताते हैं कि उन्होंने गांव के झगड़ों को निपटाने के लिए गांव में ही एस-7 नाम की एक यूनिट तैयार की। इसमें ग्राम सभा और बीडीसी का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को सदस्य बनाया गया है।

सभी को पुलिस की ओर से एक पहचान पत्र देकर कहा गया है कि गांव में कोई घटना होती है, उसे सुलझाने की जिम्मेदारी आपकी होगी। इसके लिए नारा दिया गया है ‘गांव का झगड़ा गांव में निपटाएं, कोर्ट कचहरी हम क्यों जाएं’। इसका अच्छा रिस्पांस सामने आ रहा है और ज्यादातर मामले गांव में ही निपट जा रहे हैं। वहीं एस-10 के तहत उन गांवों को शामिल किया गया है जहां हिंदू-मुस्लिम समुदाय साथ-साथ रहते हैं।
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यहां दोनों पक्षों से पांच-पांच लोगों की टीम बनाई गई है उसे गांव में किसी भी तरह के झगड़े को निपटाने की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही उनसे कहा गया है कि घटना के वास्तविक जानकारी ही पुलिस, नेताओं या वहां आने वाले अन्य कोई संगठन को दी जाए। अनंत देव का मानना है कि कई बार छोटे-छोटे विवाद बड़ा रूप ले लेते हैं। लेकिन इस व्यवस्था से छोटे-मोटे विवादों को आपस में निपटाया जा रहा है। इन टीमों को तैयार करने के लिए एसएसपी अनंत देव खुद थाने-थाने गए और यूनिट तैयार कराकर उन्हें परिचय पत्र दिए।

पीलीभीत: फरियादियों की खातिरदारी ने बदला नजरिया

पीलीभीत में थानों पर आने वाले फरियादियों की शिकायत बाद में सुनी जाती है, पहले फरियादियों का मुंह मीठा कराया जाता है। इसकी शुरुआत पीलीभीत में इससे पहले एसपी रहे देवरंजन वर्मा ने की थी।

जुलाई में देवरंजन वर्मा हटे और वहां पहुंचे कला निधि नैथानी ने न सिर्फ इस व्यवस्था को चालू रखा बल्कि पुलिस कर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक नई व्यवस्था भी शुरू की।

नैथानी ने एक सर्कुलर निकाल कर परिवार के किसी सदस्य के जन्मदिन जैसे महत्वपूर्ण मौकों के लिए छुट्टियां स्वीकृत करने का फैसला किया। नैथानी के इस फैसले की डीजीपी मुख्यालय स्तर पर सराहना हुई। एटीएस के आईजी असीम अरुण ने उसे अपने यहां लागू भी कराया।
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कई और जिलों में हो रहे अभिनव प्रयोग

मुजफ्फरनगर और पीलीभीत की तरह प्रदेश के कई और जिलों में पहुंचे पुलिस कप्तान अपराध नियंत्रण को नए-नए तरीके अपना रहे हैं। इसके अच्छे नतीजे भी सामने आ रहे हैं। जैसे भदोही में एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रार्थनापत्र की जांच उसी दिन की जाती है।

एसपी सचिंद्र पटेल बताते हैं कि कई बार लोग झूठी एफआईआर दर्ज कराने पहुंच जाते हैं। ऐसे में सभी थानों को निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी शिकायत आने पर उसी दिन संबंधित गांव में थाने से सिपाही और दरोगा की एक टीम जाएगी और हकीकत जानने के बाद एफआईआर होगी।

एडीजी कानून व्यवस्था आनंद कुमार बताते हैं कि कई जिलों में पुलिस कर्मी अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं।
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