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लखनऊ के राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों में चलेंगे तीन नए कोर्स

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अभिषेक सिंह, लखनऊ। राजधानी के राजकीय पॉलीटेक् िनक संस्थानों के छात्र साइबर सुरक्षा से संबंधित आधुनिक तकनीक का अध्ययन करने के साथ ड्रोन बनाने की तकनीक भी सीखेंगे। प्राविधिक शिक्षा विभाग ने नए शैक्षणिक सत्र 2022-23 से पॉलीटेक्निक संस्थानों में चार नए आधुनिक पाठ्यक्रमों की शुरुआत की है। इनमें से तीन पाठ्यक्रम लखनऊ के सरकारी पॉलीटेक्निक संस्थानों में पढ़ाए जाएंगे। प्राविधिक शिक्षा परिषद ने इन पाठ्यक्रमों का सिलेबस भी जारी कर दिया है।
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पॉलिटेक्निक संस्थानों में जो चार नए पाठ्यक्रम शुरू हो रहे हैं, उनमें पीजी डिप्लोमा इन डाटा साइंस एंड मशीन लर्निंग, पीजी डिप्लोमा इन साइबर सिक्योरिटी, पीजी डिप्लोमा इन इंटरनेट ऑफ थिंग्स और पीजी डिप्लोमा इन ड्रोन टेकभनोलॉजी शामिल हैं। ये सभी न्यू एज पाठ्यक्रमों के तहत शुरू किए जा रहे हैं। उद्योगों की डिमांड और इन क्षेत्रों में कुशल कारीगरों की भारी मांग को देखते हुए यह पहल की गई है। इन चारों पाठ्यक्रमों में से इंटरनेट ऑफ थिंग्स गवर्नमेंट गर्ल्स पॉलीटेक्निक और पीजी डिप्लोमा इन साइबर सिक्योरिटी व पीजी डिप्लोमा इन डाटा साइंस एंड मशीन लर्निंग गवर्नमेंट पॉलीटेक्निक में शुरू किया जा रहा है। इन सभी पाठ्यक्रमों की अवधि एक वर्ष की है। इनमें स्नातक उत्तीर्ण छात्र दाखिला ले सकेंगे। दाखिला संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद की काउंसिलिंग के माध्यम से दिया जाएगा।
75 तक होंगी सीटें
इन तीनों पाठ्यक्रमों में 75 सीटें होंगी। इनमें 60 सीटें रेग्युलर तो 15 सीटें ईडब्लूएस की होंगी। प्राविधिक शिक्षा परिषद के सचिव सुनील सोनकर ने बताया कि पाठ्यक्रम आधुनिक तकनीकों पर आधारित हैं। फिलहाल इन्हें राजकीय पॉलीटेक्निक में शुरू किया जा रहा है। गर्वनमेंट गर्ल्स पॉलीटेक्निक के प्रधानाचार्य संजय के श्रीवास्तव ने बताया कि उनके यहां पर इंटरनेट ऑफ थिंग्स पाठ्यक्रम चलेगा। इससे छात्राएं इंटरनेट से जुड़ी आधुनिक तकनीक का ज्ञान हासिल कर पाएंगी।
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रोजगार के सबसे ज्यादा अवसर मिलेंगे
इन आधुनिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्रों के पास अगले पांच साल में रोजगार के अवसरों की भरमार होगी। तीनों पाठ्यक्रमों में पढ़ाए जाने वाली तकनीक की भारी मांग है। ड्रोन तकनीकी हर क्षेत्र में इस्तेमाल करने के लिए तेजी से प्रयोग की जा रही है। छात्र ड्रोन बनाने की तकनीक व कार्यप्रणाली का अध्ययन करेंगे। उधर, साइबर अपराधों को देखते हुए साइबर विशेषज्ञों की मांग भी बढ़ती जा रही है। वहीं, जिस तरह से इंटरनेट जीवन का अहम हिस्सा बनता जा रहा है, उस लिहाज से बाजार में विशेषज्ञों की भारी कमी है।
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