एमडी के मुताबिक कमता अड्डे से पूर्वांचल के गोरखपुर, देवीपाटन मंडल की बसें चलने से आलमबाग बस अड्डे की 29 किमी और कैसरबाग बस अड्डे की दूरी 12 किमी कम होगी। बाहरी क्षेत्रों द्वारा संचालित लखनऊ तक की बसों को कमता अड्डे से वापस करने पर प्रति बस लगभग 24 किमी कैसरबाग स्टैंड न जाने से एवं आलमबाग बस स्टैंड न जाने से 58 किमी कम होगी। वहीं, यात्रियों पर किराये का बोझ भी कम होगा।
कैसरबाग से हो रहा 700 बसों का संचालन
कैसरबाग अड्डे से लगभग 700 बसों का संचालन हो रहा है। इनका 1400 बार आना-जाना होता है। वहीं, अड्डे पर बसें खड़ी करने की जगह न होने से सड़क जाम होती है। कैसरबाग से सीतापुर मार्ग होकर बरेली, मुरादाबाद व उत्तराखंड के देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, टनकपुर मार्ग के अतिरिक्त गोरखपुर, आजमगढ़, अयोध्या, देवीपाटन मंडलों के जनपदों से दिल्ली की ओर बसें चलती है।
जानकीपुरम अड्डे से 400 बसें चलेंगी। इससे कैसरबाग अड्डे से 60 फीसदी बसों का लोड कम होगा और जाम नहीं लगेगा। गोरखपुर से दिल्ली जाने वाली बसें कैसरबाग न आकर पॉलीटेक्निक से सीधे रिंग रोड होते हुए सीतापुर रोड पर जानकीपुरम अड्डा होकर दिल्ली चली जाएंगी।
इसी अड्डे से बरेली होते हुए हल्द्वानी, टनकपुर, हरिद्वार एवं देहरादून तथा दिल्ली, सहारनपुर, मेरठ रूट की बसों का संचालन कराने से कैसरबाग की दूरी लगभग 14 किमी प्रति बस कम होगी। पूर्वांचल की ओर से कानपुर की ओर जाने वाली बसें शहीद पथ होते हुए सीधे कानपुर रोड होकर गंतव्य को जाएंगी। इससे आलमबाग एवं कैसरबाग अड्डे पर बसों का दबाव कम होगा।