शहर में अब ब्लैक होल टेक्नोलॉजी वाली एक ऐसी मशीन लगने जा रही है, जो कूड़े को अंदर ही जलाकर राख कर देगी। इसकी राख भी हानिकारक नहीं होगी और इसका उपयोग कई कार्यों में किया जा सकेगा। मशीन की खासियत यह है कि इसमें सड़ने और न सड़ने वाला दोनों तरह का कचरा डाला जा सकेगा। नगर निगम की ओर से पांच मीट्रिक टन क्षमता की मशीन लगाने का टेंडर भी जारी कर दिया गया है। भुवनेश्वर नगर निगम ने ऐसी मशीन अपने यहां लगाई है।
कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण के लिए शिवरी में प्लांट है, जहां शहरभर का कचरा ले जाया जाता है। फिर वहां मशीन से सड़ने और न सड़ने वाले कचरे को अलग किया जाता है। सड़ने वाले कचरे से कम्पोस्ट बनाई जाती है और गैर सड़ने वाले कचरे से दूसरी चीजे बनती हैं। अब जो मशीन लगाई जानी है, उसमें यह झंझट नहीं होगा। इस मशीन में जो कचरा डाला जाएगा, उसे छांटने की जरूरत भी नही पड़ेगी। बिजली का भी खर्चा भी न के बराबर होगा और प्रदूषण भी नहीं होगा।
कैसे काम करेगी मशीन
नगर आयुक्त अजय द्विवेदी ने बताया कि यह मशीन वहां बहुत कारगर है, जहां कूड़े को एक से दूसरे स्थान पर ले जाकर निस्तारित करने में कठिनाई होती है। यह छोटी मशीन होती है जो इंसीनरेशन और प्लाज्मिक डी कम्पोजीशन तकनीक पर काम करती है। इसमें जो कूड़ा डाला जाता है, उसके कंप्रेस होने केबाद उसका तापमान 400-450 डिग्री तक पहुंच जाता है। उस तापमान पर सारा कचरा जलकर राख हो जाता है। यह प्रक्रिया हवा के प्रेशर से होती है। जलने के दौरान जो हानिकारक तत्व होते हैं वह मशीन की प्लाज्मा तकनीक से नष्ट हो जाते हैं। कचरा जलने के बाद जो फ्लाई ऐश बनेगी वह ब्रिक टाइल्स व अन्य कार्यों के लिए उपयोग में आएगी।
लैंड फिल साइट भी नहीं बनानी पड़ेगी
अभी जो प्लांट हैं, वहां कंपोस्ट बनाने के लिए लैंड फिल साइट के लिए भी जमीन दी गई है, जहां सड़ने वाले कचरे को डाला जाता है। कूड़े की मात्रा को देखते हुए लैड फिल साइट और जमीन की भी जरूरत आने वाले समय में पड़ेगी, मगर ब्लैक होल तकनीक वाली मशीन में लैंड फिल साइट की कोई आवश्यकता नहीं है।
यह नई तकनीक की छोटी मशीन होगी। जिस इलाके का कूड़ा होगा, वहां पर लगी मशीन में ही उसे डाल दिया जाएगा। अभी एक मशीन लगाने का प्रस्ताव है। सफल रही तो और भी मशीनें लगाने पर विचार किया जाएगा।
- अजय द्विवेदी, नगर आयुक्त