बसपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि बहनजी आकाश को युवा नेता के तौर पर पार्टी में आगे बढ़ा रही हैं। किसी पद पर न होने के बावजूद उनके सहारे युवाओं को पार्टी से जोड़ने में कामयाबी मिलेगी।
इस नेता ने बताया कि लंदन से एमबीए करके लौटे आकाश के पास पार्टी में अभी कोई जिम्मेदारी नहीं है, लेकिन पार्टी की हर अहम गतिविधि में उन्हें शामिल किया जा रहा है। सियासी चुनौतियों के कठिन हालात से पार्टी की बेहतरी का तानाबाना बुन रहीं बसपा सुप्रीमो आकाश को इस समय गठबंधन के प्रयोग से लेकर सीटों के बंटवारे तक के दांवपेंच सिखा रही हैं।
परिपक्व होने के बाद आकाश को वे अपनी सियासी विरासत सौंप दें तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। गौरतलब है कि किसी जमाने में मायावती के एक संकेतात्मक एलान के बाद लोग आजमगढ़ के राजाराम को सियासी उत्तराधिकारी के तौर पर देखने लगे थे। लेकिन राजाराम को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद से हटाने के बाद जब आनंद को यह जिम्मेदारी दी गई तो उनका नाम लिया जाने लगा।
आनंद को पर्दे के पीछे भेजने के बाद जिस तरह आकाश को आगे बढ़ाया जा रहा है, इसे मायावती की दूरगामी रणनीति मानी जा रहा है।
- मायावती ने सहारनपुर हिंसा के बाद जब दौरा किया था, आकाश वहां भी साथ थे।
- मेरठ में हुई रैली में भी आकाश मंच पर थे।
- लखनऊ में बसपा नेताओं व को-ऑर्डिनेटरों की बैठक में मायावती ने आकाश का परिचय अपने भतीजे के रूप में कराया था।