नेपाली शोधार्थी विष्णु पौडेल व महेश पांडेय।
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नेपाल इस समय आग के गोले में तब्दील है। सड़क पर मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष जारी है। सरकारी दफ्तर जल रहे हैं, नेता जान बचाकर भाग रहे हैं। राजधानी से लेकर पर्यटन स्थलों तक सन्नाटा पसरा है। बीते तीन दिनों से युवाओं का हिंसक आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा। राजधानी सहित प्रदेश के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे नेपाली शोधार्थियों ने अमर उजाला को फोन पर यह आंखों देखी स्थिति बताई है।
नेपाली युवाओं के इस आंदोलन का छात्रों और पर्यटकों पर खासा असर पड़ा है। लखनऊ विश्वविद्यालय, बीबीएयू, गोरखपुर विश्वविद्यालय सहित अन्य संस्थानों में पढ़ रहे नेपाली छात्रों ने बताया कि भारत-नेपाल की सभी सीमाएं बंद हैं, हवाई यात्रा भी रोक दी गई है। उनके अलावा हजारों पर्यटक जो हाल ही में काठमांडू, लुंबिनी, नगरगोट, गोसाइँकुंडा और बांदीपुर पहुंचे थे, बॉर्डर सील होने के कारण वापस नहीं आ पा रहे।
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