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विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस: उम्मीद बनाए रखने की कला से रोक सकते हैं सुसाइड... विशेषज्ञों ने की चर्चा

Wed, 10 Sep 2025 04:43 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस से पूर्व केजीएमयू में विशेषज्ञों ने कहा कि आत्महत्या अचानक नहीं होती, बल्कि कई मानसिक संघर्षों का नतीजा होती है। समय रहते संवाद, पारिवारिक सहयोग और तनाव प्रबंधन सिखाने से आत्महत्या को रोका जा सकता है।
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विशेषज्ञों ने की चर्चा। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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आत्महत्या का ख्याल कभी अचानक नहीं आता, बल्कि यह कई बार के मानसिक संघर्ष का नतीजा होता है। कोई भी व्यक्ति आत्महत्या से पहले औसतन 20 बार मरने की तरकीबें सोचता है। भारत में हर साल करीब 1.8 लाख लोग अपनी जान दे रहे हैं।

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ये बातें विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के पूर्व केजीएमयू में आत्महत्या विषय पर जागरुकता कार्यक्रम में मनोविज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों ने कहीं। विशेषज्ञों ने कहा कि आत्महत्या से व्यक्ति का दर्द खत्म नहीं होता, बल्कि वह उसके अपनों तक पहुंच जाता है।
 
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मनोचिकित्सक डॉ. सुरजीत कुमार कर ने कहा कि आत्महत्या रोकने का सबसे आसान तरीका है समय रहते संवाद। जब भी यह ख्याल आए, कुछ मिनट अपने करीबी से जरूर बात करें। यही एक चीज आत्महत्या के खयाल को तोड़ देती है।

मनोचिकित्सक डॉ. मोहिता ने कहा कि ऐसे मामलों में दवाइयां और काउंसिलिंग इलाज के दो तरीके हैं, लेकिन ये तभी कारगर होंगे जब परिवार साथ दे। मनोचिकित्सक डॉ. रश्मि सिंह ने कहा कि माता-पिता व शिक्षक बच्चों को समय प्रबंधन और तनाव कम करने के तरीके जरूर सिखाएं।

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प्रो. बंदना गुप्ता ने बताया कि महिलाओं में आत्महत्या के मामले पुरुषों से ज्यादा हैं। घरेलू हिंसा, शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना इसकी बड़ी वजह है। नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे के अनुसार आत्महत्या के 30 प्रतिशत मामलों में घरेलू हिंसा जिम्मेदार है।

प्रो. विवेक अग्रवाल ने कहा कि संवेदनशील मीडिया रिपोर्टिंग से समाज को जागरूक किया जा सकता है। कार्यक्रम में प्रो. आदर्श त्रिपाठी, प्रो. श्वेता सिंह और डॉ. प्रसाद कन्नेकांती मौजूद रहे।

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ऐसे पहचानें आत्महत्या के बारे में सोचने वाले लोगों को

मनोविशेषज्ञ डॉ. प्रसाद कन्नेकांती कहते हैं कि जो व्यक्ति आत्महत्या के बारे में सोचते हैं, उसके लक्षण उनके व्यवहार में झलकने लगते हैं। जरूरत है उसे पहचानने की और उस व्यक्ति को सही समय पर मनोचिकित्सक के पास ले जाने की। प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं...

- व्यक्ति में निराशा के भाव नजर आते हैं। वह जीवन-मृत्यु से जुड़ी बातें ज्यादा करने लगता है।
- ऐसे ज्यादातर व्यक्ति अकेलापन पसंद करते हैं। उनके व्यवहार में अचानक बड़े बदलाव नजर आते हैं।
- चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है। काम में मन नहीं लगता, भूख-प्यास को नजरअंदाज करने लगते हैं।
- सही समय पर मरीज को उम्मीद बनाए रखने की कला के जरिये सकारात्मक बनाया जा सकता है।
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