नेपाल के पर्यावरण मंत्री विश्वेंद्र पासवान ने कहा है कि भारत व नेपाल में दलितों के अधिकार को लेकर एक ही तरह की धारणा व व्यवस्था है। दोनों देशों में वंचित समुदाय को समाज से दूर रखने व हिंदू राष्ट्र के रूप में स्थापित करने का प्रयास हो रहा है।
दलित व अंबेडकरवादी लोगों को हिंदूवादी सोच के लोगों से सतर्क रहना होगा, तभी उनको जनसंख्या के आधार पर सत्ता व व्यवस्था में भागीदारी मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि जब नेपाल में संविधान की स्थापना हुई व राजशाही का खात्मा हुआ तो भारत को यह स्वीकार नहीं हुआ।
पासवान शुक्रवार को लखनऊ स्थित भारत रत्न बोधिसत्व बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर महासभा में आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह व ‘डॉ. अंबेडकर की बात’ विषयक संवाद में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि वंचितों को अधिकार देने की प्रेरणा उनको बाबा साहेब व भारत की धरती से ही मिला था। इस अभियान की शुरुआत भी उन्होंने भारत से ही की थी।
नेपाल में जब संविधान तैयार हो रहा था व उसमें वंचित समाज के भागीदारी का बात चल रही थी तो भारत के अंबेडकरवादियों ने उनका साथ दिया। उसका ही परिणाम है कि वे आज नेपाल के पहले दलित मंत्री हैं।
दलितों की जनसंख्या अधिक है और सरकार ‘दुश्मनों’ की
नेपाल के अंबेडकर के रूप में प्रसिद्ध विश्वेंद्र ने कहा कि बाबा साहेब जनसंख्या के आधार पर दलितों को आरक्षण देने की बात करते थे, लेकिन भारत और नेपाल में सामंती व्यवस्था के चलते ऐसा नहीं हो पा रहा है।
नेपाल में दलितों की संख्या 74.2 प्रतिशत है, लेकिन भागीदारी नहीं है। इसी प्रकार भारत में भी दलितों की जनसंख्या अधिक है और सरकार ‘दुश्मनों’ की है। इससे पहले महासभा की ओर से नेपाल के पर्यावरण मंत्री को ‘डॉ अंबेडकर रत्न’ का खिताब दिया गया।
भारत को दी नसीहत
नेपाल के कैबिनेट मंत्री ने अप्रत्यक्ष रूप से भारत पर नेपाल के मामले में हस्तक्षेप करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नेपाल में संविधान निर्माण के खिलाफ मधेसियों ने जो आंदोलन किया था, उन्हें इसी धरती से उकसाया जा रहा है, क्योंकि नेपाल में राजशाही व्यवस्था के समाप्त होने से हिंदूवादी सोच को झटका लग रहा है।
साइकिल पथ को सराहा
पासवान लखनऊ के साइकिल पथ के कायल हो गए। उन्होंने कहा कि वे नेपाल में पर्यावरण संरक्षण के लिए मैत्री यात्रा कर रहे हैं, जिसके तहत वे खुद साइकिल से चलाते हैं। लेकिन लखनऊ जैसा ‘साइकिल पथ’ वहां नहीं है। उन्होंने कहा शनिवार को वे लखनऊ में साइकिल चलाकर मैत्री यात्रा करेंगे।