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क्या होगा, शाह-आजम पर पाबंदी का नतीजा

Sun, 13 Apr 2014 02:39 PM IST
राजेंद्र सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
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ध्रुवीकरण के लिहाज से फायर ब्रांड नेता माने जाने वाले अमित शाह और आजम खां पर पाबंदी लगने के बाद भाजपा-सपा के नफा-नुकसान को लेकर गुणा-भाग लगाया जाने लगा है।
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दूसरे चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जिन 11 सीटों पर चुनाव होना है उनमें लगभग आधा दर्जन सीटें मुस्लिम बहुल हैं।

दोनों दलों की नजरें इन सीटों पर वोटों के ध्रुवीकरण पर लगी हैं। शाह और आजम अपनी मुहिम को अब पर्दे के पीछे से अंजाम देंगे।

38 से 52 फीसदी मुस्लिम आबादी वाली इन सीटों पर वोटरों को लुभाने में बसपा और कांग्रेस भी पीछे नहीं हैं।

तीखे बोलों ने माहौल गरमाया

पहले चरण के मतदान से पहले अमित शाह और आजम खां के तीखे बोलों ने वेस्ट यूपी के माहौल को काफी गरमाया।

अधिकतर सीटों पर वोटों का ध्रुवीकरण होता नजर आया। दूसरे चरण की कई सीटों का मिजाज भी कमोबेश पहले चरण वाले लोकसभा क्षेत्रों जैसा है।

नगीना, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, रामपुर जैसी सीटों पर मुस्लिम वोटों की तादाद प्रदेश के दूसरे हिस्सों की तुलना में ज्यादा है। रामपुर में सर्वाधिक 52 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं।

अन्य सीटों पर भी 38 से 45 प्रतिशत मुसलमान हैं। अकेले मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण यहां की सियासी तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकता है।

बसपा का समीकरण तोड़ना है चुनौती

बरेली, आंवला, पीलीभीत, बदायूं, लखीमपुर खीरी और शाहजहांपुर में भी मुस्लिम वोट अच्छी संख्या में हैं।

भाजपा की योजना इन इलाकों में हिंदू वोटों को एकजुट करने की है तो सपा मुस्लिम वोटों पर पकड़ कमजोर नहीं होने देना चाहती।

इन इलाकों में कई सीटों पर बसपा ने दलित-मुस्लिम समीकरण बनाने की कोशिश की है, जो दूसरे दलों पर भारी पड़ सकता है। शायद इसीलिए भाजपा और सपा दोनों ही इसे तोड़ना चाहती हैं।

भाजपा महासचिव अमित शाह ने पहले चरण वाली सीटों पर दलित वोटों को लेकर काफी कसरत की। दलित वोटों के एक छोटे हिस्से का रुझान मतदान के समय भाजपा की तरफ नजर भी आया।

इसी तरह मुस्लिम वोटों की एकजुटता के लिए सपा ने आजम खां को आगे किया। पहले चरण में कुछ सीटों पर सपा के पक्ष में मुस्लिम खड़े दिखाई पड़े।
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मुस्लिम मतदाताओं पर मारामारी

भाजपा और सपा के इन दोनों हॉट नेताओं के चुनाव प्रचार करने पर रोक लगने से हालांकि ध्रुवीकरण का संदेश तो चला गया लेकिन कार्यकर्ताओं और पब्लिक में अब उनकी मौजूदगी नहीं दिखेगी।

इससे कुछ नुकसान भी हो सकता है। अमित शाह आम तौर पर बड़ी सभाएं करने के बजाय कार्यकर्ताओं और क्षेत्र के असरदार लोगों के सम्मेलनों में जोशीले ढंग से बोलते हैं।

इसके विपरीत आजम जनसभाओं में फिरकापरस्त ताकतों पर आक्रामक अंदाज में हमला करते हैं। प्रचार पर रोक के चलते वे सम्मेलन और सभाओं में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।

गौरतलब है कि पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर सपा-बसपा और कांग्रेस के बीच मुस्लिम वोटों को लेकर मारामारी है।
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