इन चारों कॉलेजों में एमबीबीएस की 100 सीटें हैं। जिसमें 15 फीसदी सीटें केंद्र के कोटे की हैं। बची 85 फीसदी सीटों में 78 फीसदी एससी-एसटी को दी गईं। बाकी सीटों पर पिछड़े व सामान्य वर्ग के अभ्यार्थियों को दाखिला दिया गया। खास बात यह है कि इन चारों कॉलेजों में ईडब्ल्यूएस को एक भी सीट नहीं दी गई।
हाईकोर्ट के आदेश को लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग दोबारा अपील की तैयारी में है। इसके लिए संबंधित कॉलेजों के निर्माण से जुड़े दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं। उन दस्तावेजों की भी पड़ताल शुरू की गई है, जिसमें निर्माण के वक्त आरक्षण की बात कही गई है। विभाग के अधिकारी यह भी तर्क दे रहे हैं कि संबंधित कॉलेजों में पहले से ही इसी आरक्षण व्यवस्था के तहत एमबीबीएस की सीटें आवंटित होती रही हैं। यही वजह है कि इस वर्ष भी पूर्व में लागू व्यवस्था के तहत सीटें आवंटित की गई है। प्रथम चरण की काउंसिलिंग रद्द किए जाने से सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों की सीट मैट्रिक प्रभावित होगी। खाली सीटों के आवंटन में भी दिक्क्तें आएंगी।