लखनऊ। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) में पौधों के विकास और बदलते मौसम जैसी चुनौतियों से निपटने में उनकी क्षमता पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी बुधवार से शुरू हुई। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और एएनआरएफ के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में देश के कई हिस्सों से वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षक और विद्यार्थी शामिल हुए।
मुख्य अतिथि पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. त्रिलोचन मोहपात्रा ने कहा कि खाद्य, पोषण और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में पादप विज्ञान की भूमिका लगातार बढ़ रही है। एनबीआरआई के निदेशक डॉ. अजीत कुमार शासनी ने संस्थान की वैज्ञानिक उपलब्धियों, जैव विविधता संरक्षण और नई अनुसंधान सुविधाओं की जानकारी दी। संगोष्ठी के संयोजक डॉ. समीर वी. सावंत ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
पहले दिन पौध हार्मोन, तनाव सहनशीलता, जड़ विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़े विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने शोध प्रस्तुत किए। युवा शोधकर्ताओं के लिए पोस्टर प्रस्तुति सत्र भी आयोजित हुआ। इस अवसर पर डॉ. मोहपात्रा ने एनबीआरआई में वन-विलास बोगनवेलिया जर्मप्लाज्म संग्रह और नए सम्मेलन कक्ष अपराजिता का उद्घाटन किया। बोगनवेलिया की 400 से अधिक किस्मों वाला यह देश का सबसे बड़ा संग्रह है।