राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एसएसपी को निर्देश दिया है कि लखनऊ में नाबालिग लड़की से दुराचार, घटना का वीडियो बनाने और उसे ब्लैकमेल करने के मामले में सात दिन में जांच रिपोर्ट दें। साथ ही पीड़िता की पहचान किसी स्थिति में जाहिर न होने दें।
बालिका व उसके परिवार को सुरक्षा देने और उसे स्कूल भेजने के लिए भी पुख्ता कदम उठाने को आयोग ने कहा है। मामले में आरोप है कि एक व्यक्ति ने 15 वर्षीय बालिका का दुराचार किया। इसका वीडियो बनाया गया और लंबे समय तक पीड़िता का दुराचार किया गया।
इससे उसकी तबीयत बिगड़ गई। डर से उसने स्कूल जाना छोड़ दिया। परिवार को जानकारी हुई तो उन्हें एफआईआर करवाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। जांच शुरू हुई तो मेडिको लीगल के लिए अस्पताल पहुंची बालिका को डराया-धमकाया गया।
उसका मेडिकल नहीं हो सका। यह भी आरोप लगाया गया है कि पुलिस आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही। इन हालात की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बाल आयोग में की थी।
क्या कदम उठाए, दस्तावेजों सहित बताएं
आयोग सदस्य यशवंत जैन ने एसएसपी को निर्देश दिए हैं कि वे हर स्थिति में बालिका की पहचान को छिपाए रखते हुए सुनिश्चित करें कि वह सुरक्षित रूप से स्कूल जा सके। वहीं, पूरे मामले में अब तक क्या जांच हुई, समस्त दस्तावेजों सहित आयोग को सात दिन में रिपोर्ट भेजें।
इसमें पीड़िता के दस्तावेजों सहित एफआईआर, बालिका को स्कूल भेजवाने के लिए उठाए कदम की रिपोर्ट, आरोपी के खिलाफ की कार्रवाई की रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट, पीड़िता के बयान, न्यायालय में दाखिल चार्जशीट, प्रकरण से संबंधित अन्य जानकारियां मुहैया करवाएं।