राम मंदिर मुद्दे को लेकर सूबे के राज्यपाल भले ही केंद्र सरकार से उम्मीद लगाए हों, पर अयोध्या से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरी खत्म नहीं हो रही है। रामनगरी से जनकपुर (नेपाल) तक प्रस्तावित राम बारात में भी प्रधानमंत्री शामिल नहीं होंगे। विहिप महामंत्री चंपत राय की ओर से पीएमओ भेजे गए आग्रह पत्र पर न कह दिया गया है।
विहिप ने 17 नवंबर को राम बारात के शुभारंभ अथवा 30 नवंबर को समापन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अयोध्या आने का आग्रह किया था। इससे पूर्व बीते डेढ़ साल में नरेंद्र मोदी को अयोध्या लाने में विहिप, संत व संघ के लोग तीन बार नाकामयाब हुए हैं।
विहिप लगातार नरेंद्र मोदी को अपने कार्यक्रमों से जोड़ने में सफल होती नहीं दिख रही है। खासकर अयोध्या को लेकर। मोदी को प्रधानमंत्री बने चार माह बीत गए मगर चुनाव प्रचार से लेकर अब तक उन्होंने अयोध्या के विवादित परिसर में विराजमान रामलला के भव्य मंदिर निर्माण को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है।
मंदिर मुद्दा भाजपा की आत्मा
हालांकि, संघ प्रमुख मोहन भागवत से लेकर विहिप के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक अशोक सिंहल ने मंदिर मुद्दे को भाजपा की आत्मा तक करार दिया और इसी सरकार में भव्य राम मंदिर निर्माण की बाधाएं दूर होने की उम्मीद जताई। सूबे के राज्यपाल राम नाईक ने भी मंगलवार को रामनगरी आकर साफ कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच साल में राम मंदिर मामले का विवाद सुलझाने का प्रयास करेंगे।
विहिप सूत्रों का कहना है कि जब तक नरेंद्र मोदी रामनगरी के कार्यक्रमों से नहीं जुड़ेंगे, तब तक स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आएगी। इसी मंतव्य के चलते पिछले दिनों हिमाचल में हुई विहिप व प्रमुख संतों की बैठक में राम बारात निकालने के साथ ही इसके नेतृत्व के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अयोध्या लाने की रणनीति बनीं।
विहिप महामंत्री चंपत राय ने पीएमओ को आमंत्रण पत्र भी भेजा, मगर अब स्पष्ट हो गया है कि प्रधानमंत्री राम बारात के बाराती नहीं बन सकेंगे।
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से न जुड़ने की पुष्टि विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने की। उनका कहना है कि राम बारात का कार्यक्रम तय हो चुका है, इसमें आने वाले लोगों के नाम गुरुवार तक कारसेवकपुरम् में तय हो जाएंगे। फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसमें कहीं से जुड़ते नहीं दिख रहे हैं, लेकिन विहिप व संत समाज समेत तमाम प्रमुख लोग इसमें शामिल होंगे।
इस तरह हुईं मोदी को अयोध्या लाने की कोशिशें
- श्रीराम जन्मभूमि न्यास के कार्याध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की महंती के 50 वर्ष पूरे होने पर 18 जून 2013 को शुरू हुए पांच दिवसीय अमृत महोत्सव में आने का न्योता नरेंद्र मोदी ने मंजूर किया था, मगर नहीं आ सके। इसी दिन योग गुरु बाबा रामदेव ने मोदी को अयोध्या आकर रामलला के दर्शन करने की बात कही थी।
- अगस्त 2013 में 84 कोसी परिक्रमा में भी विहिप ने नरेंद्र मोदी को जोड़ने की पहल की, लेकिन परिक्रमा क्षेत्र से जुड़े जिलों के भाजपा नेताओं के अलावा कोई बड़ा नेता इसमें नहीं आ सका।
- लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान फैजाबाद की सभा से पहले वाराणसी की तर्ज पर नरेंद्र मोदी को अयोध्या में रामलला के दर्शन-पूजन से जोड़ने की मंशा भी पूरी नहीं हो पाई।
पांच वर्ष इंतजार नहीं करेगा विहिप
विहिप के प्रांतीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि अमृत महोत्सव में श्रीराम जन्मभूमि न्यास के कार्याध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के आमंत्रण पर नरेंद्र मोदी ने सहमति दी थी, लेकिन अचानक भाजपा बोर्ड की बैठक होने के चलते उनकी ओर से खेद जताया गया।
बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर निर्माण की प्रतिबद्धता वाले संकल्प से अलग नहीं हैं, ये मुद्दा हम सबके हृदय में है। रामलला का भव्य मंदिर हर हाल में बनेगा।
राज्यपाल ने पांच वर्ष की बात कही है, जबकि महंत नृत्यगोपाल जी ने दो साल में मंदिर निर्माण की बाधाएं दूर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। विहिप का मानना है कि समाधान जल्दी हो, पांच वर्ष इंतजार नहीं करेंगे।