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थम नहीं रहा 'मोदी की कुर्सी' का भाव

Wed, 27 Nov 2013 01:21 AM IST
टीम डिजिटल/आगरा
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प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी के भीतर लोकप्रियता का नया पैमाना बनी ‘कुर्सी’ का भाव 24 घंटे के भीतर सवा लाख से बढ़कर तीन लाख हो गई।
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इधर जितने भाव चढ़ रहे उधर उतनी ही भाजपा के प्रदेश नेतृत्व के चेहरे पर शिकन बढ़ रही है।

परेशानी में टेंट व्यवसायी प्रमोद उपाध्याय भी हैं। एक से एक बढ़कर प्रस्ताव लेकर आने वालों ने उनके घर पर डेरा डाल दिया है।

मीडिया कर्मियों का जमावड़ा है सो अलग। 21 नवंबर को आगरा में हुई विजय शंखनाद रैली में जिस कुर्सी पर मोदी बैठे थे उसे खरीदने की लगी होड़ को अमर उजाला ने सोमवार के अंक में उजागर किया था।

सोमवार को तमाम कार्यकर्ता इस ‘कुर्सी’ के लिए टेंट कारोबारी पार्षद प्रमोद उपाध्याय के घर और गोदाम पहुंचे। सोमवार तक बोली सवा लाख तक पहुंच चुकी थी।

उनका कहना था कि जब सचिन तेंदुलकर के बल्ले की कीमत लग सकती है तो हम अपने चहेते नेता की यादगार कुर्सी को क्यों नहीं खरीद सकते।

दिलचस्प यह है कि बड़ी कीमत और दबाव के बाद भी प्रमोद इसे बेचने को तैयार नहीं हैं।

खरीददारों को सफलता नहीं मिली तो उन्होंने कुर्सी की एक झलक ही दिखा देने की गुजारिश की। हाल यह है कि कुर्सी को ‘दर्शनार्थ’ बाहर रख दिया गया है।

प्रमोद उपाध्याय ने बताया कि सबसे बड़ा ऑफर तीन लाख रुपये का एटा जिले की एक नगर पालिका अध्यक्ष का है।

भाजपा में कुर्सी नहीं बिकती: लक्ष्मीकांत
मोदी की कुर्सी की मोहब्बत पार्टी को दूसरे दलों का निशाना न बना दे, अब भाजपा का प्रदेश नेतृत्व इसे लेकर चिंतित है। प्रदेश संगठन इस होड़ और हो-हल्ले को यहीं खत्म कर देना चाहता है।
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प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने ‘अमर उजाला’ से कहा कि कुर्सी प्रकरण रविवार को आगरा में ही पार्टी की प्रेस कांफ्रेंस के बाद नेताओं के आपसी हास-परिहास से उठा।
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उन्होंने कहा कि यह कोई गंभीर विषय नहीं है। भाजपा में कुर्सी बिकती नहीं है। कार्यकर्ता उसे अपनी मेहनत से हासिल करते हैं।
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