यूपी के भाजपा नेता कहीं मोदी के लिए मुसीबत न बन जाएं। बहराइच और आगरा की रैलियों में तो कुछ ऐसा ही दिखा।
बहराइच में पता नहीं किसने मोदी को आंकड़ा दे दिया कि यूपी में गन्ना किसानों का 6000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। वे तो बोलकर चले गए।
पर लोगों को उन पर निशाना साधने का मौका मिल गया। आरोप लगा कि जो नेता 2500 करोड़ बकाया को 6000 करोड़ बताकर तालियां बजवा सकता है, वह कुछ भी बोल सकता है।
आगरा की रैली में मुजफ्फरनगर दंगा के आरोपी विधायकों संगीत सोम व सुरेश राणा का मोदी के हाथों सम्मान कराने की घोषणा कर दी। मोदी के हाथों न सम्मान होना था और न हुआ।
पर मोदी व भाजपा के लिए मुसीबत जरूर बढ़ गई। मोदी के हाथों सम्मान न होने से हो रही किरकिरी पर विधायकों से सफाई देते नहीं बन रहा।
पश्चिम में जाट, गूजर और कई ब्राह्मण नेता इस तर्क के साथ विरोध पर उतर आए हैं कि जब संगीत सोम व राणा का सम्मान हो सकता है तो अन्य जातियों के उन लोगों का क्यों नहीं जो संघ के पुराने कार्यकर्ता हैं और मुजफ्फरनगर मामले में ही उन्हें भी फंसाया गया है।
संगीत सोम व राणा भी कम परेशान नहीं होंगे। कहां तो वे लोकसभा चुनाव लड़कर संसद में पहुंचने का सपना देख रहे थे और यहां तो उनका विरोध शुरू हो गया।