केजीएमयू की ओपीडी और क्वीन मेरी की अमृत फार्मेसी में नारकोटिक और एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री में खेल चल रहा है। शेड्यूल एच की दवाएं यहां बिना डॉक्टर की सलाह के बेची जा रही हैं। यह खुलासा बुधवार को एफएसडीए की जांच में हुआ। इन दवाओं की बिक्री संबंधी गड़बड़ी पाई गई। इसके बाद दोनों अमृत फार्मेसी में नारकोटिक और एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी गई। वहीं, जांच के लिए छह सैंपल भेजे गए हैं। अमृत फार्मेसी के खिलाफ कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा भी गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत के बाद एफएसडीए के इंस्पेक्टर बृजेश कुमार यादव एवं माधुरी सिंह टीम के साथ दोपहर 12 बजे केजीएमयू की ओपीडी स्थित अमृत फार्मेसी के मुख्य दवाखाने पहुंचीं। यहां शेड्यूल एच और एच वन की दवाओं की खरीद व बिक्री संबंधी रिकॉर्ड अधूरे पाए गए। बिना डॉक्टर की सलाह के भी नारकोटिक दवाएं बिकती पाई गईं। वहीं, कैशमेमो में लाइसेंस नंबर व अन्य जरूरी चीजें अंकित नहीं थी। दवाओं के भंडारण में भी गड़बड़ी थी। इस पर शेड्यूल एच और एच वन की दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी गई।
खास बात यह है कि शेड्यूल एच और एच वन की दवाओं की खरीद और बिक्री संबंधी रजिस्टर भी नहीं मिला। यहां से ट्रेमाडॉल, एल्प्राजडोलान और एक एंटीबायोटिक के नमूने लिए गए हैं। स्टोर संचालक भी गायब मिला। इसके बाद टीम क्वीन मेरी स्थित अमृत फार्मेसी पहुंची। यहां भी नारकोटिक और एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री संबंधी दस्तावेज नहीं मिले। यहां से दो नमूने लिए गए हैं। इसके बाद टीम ठाकुरगंज स्थित विमला मेडिकल स्टोर पहुंची। यहां फार्मासिस्ट नहीं मिला। दवाओं के भंडारण में गड़बड़ी पाई गई। यहां से एक दवा का सैंपल लिया गया है। सभी सैंपल जांच को लैब भेजे गए है। तीनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए ड्रग लाइसेंस अथारिटी को लिखा गया है।
क्या है एच और एच वन ग्रुप की दवाएं
बृजेश कुमार यादव ने बताया कि शेड्यूल एच व एच वन में वे नारकोटिक दवाएं हैं, जो ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन और अन्य मानसिक रोग में डॉक्टर की सलाह पर मरीज को दी जाती हैं। इनकी संख्या करीब पांच हजार है। एफएसडीए की ओर से इन दवाओं की बिक्री को लेकर गाइडलाइन बनी है। इस ग्रुप की दवाओं की बिक्री के लिए मेडिकल स्टोर मालिक को डॉक्टर के पर्चे की कॉपी, मरीज का नाम, मोबाइल नंबर और दवाओं की संख्या का रिकॉर्ड रखना होता है।
फर्म संचालक का मौजूद रहना जरूरी
नारकोटिक दवाओं की बिक्री करने वाली फर्म पर उसके संचालक का मौजूद रहना जरूरी होता है। यदि एक फर्म के नाम से कई स्टोर हैं तो लाइसेंस लेते वक्त संबंधित फर्म को यह बताना होता है कि किस स्टोर पर कौन-कौन सा व्यक्ति संचालक प्रतिनिधि के रूप में रहेगा। कि सी कारणवश वह नहीं रहता है तो उसके स्थान पर दूसरे व्यक्ति का नाम भी दर्ज रहता है, जो दवा के संबंध में जानकारी दे सके।
‘अमर उजाला’ ने किया था खुलासा
‘अमर उजाला’ ने एक अगस्त को ‘बस रसीद न मांगो, सभी प्रतिबंधित दवाएं मिलेंगी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें बताया गया था कि प्रतिबंधित दवाएं राजधानी के मेडिकल स्टोरों पर खुलेआम बिक रही हैं। इसके बाद एफएसडीए ने छापामारी शुरू की। कई मेडिकल स्टोरों को नोटिस जारी किया था। अब केजीएमयू में मामला पकड़ में आया है।
गलत तरीके से हो रहा दवाओं का कारोबार खत्म करने को विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। जल्द ही अन्य अस्पतालों के दवाखानों की भी पड़ताल की जाएगी।
- रमाशंकर, असिस्टेंट कमिश्नर, एफएसडीए
प्रकरण अमृत फार्मेसी के संदर्भ में है। संचालक से बात की गई। उनका कहना है कि सभी दस्तावेज दिखाए गए हैं। गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है। केजीएमयू का सीधा संबंध भी नहीं है। फिर भी मामले की गंभीरता को देखते हुए अमृत फार्मेसी से स्पष्टीकरण लिया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. सुधीर सिंह, मीडिया प्रभारी, केजीएमयू
ड्रग इंस्पेक्टर रूटीन चेकिंग पर आए थे। कोई शिकायत नहीं थी। तीन घंटे तक पड़ताल चली। इस दौरान बिक्री रोक दी गई थी। करीब तीन हजार मरीज परेशान रहे। कोई गड़बड़ी नहीं मिली है। सभी दस्तावेज दे दिए गए हैं। किस आधार पर गड़बड़ी की बात क ह रहे हैं यह तो वहीं जानें। हमारे पास सभी जरूरी दस्तावेज और लाइसेंस हैं।
- संजीव राय, संचालक अमृत फार्मेसी