नैनो तकनीक का इस्तेमाल जहां प्रोडक्टिविटी को बढ़ा सकता है। वहीं, दूसरी तरफ कीटों से होने वाले नुकसान को भी कम कर सकता है।
लखनऊ और कानपुर के वैज्ञानिकों की टीम को नैनोट्यूब्स के उपयोग से मोटे अनाज वाली फसलों के उत्पादन बढ़ाने में सफलता मिली है।
वैज्ञानिकों की टीम के मुताबिक, अगर मल्टी वॉल्ड कार्बन नैनोट्यूब्स (एमडब्ल्यूसीएन) के 50 माइक्रोग्राम प्रति लीटर घोल का इस्तेमाल किया जाए।
इससे जड़ों और दूसरे बढ़त वाले हिस्सों पर अच्छा असर होता है। जहां एक तरफ बीजों की क्षमता बढ़ी। वहीं, बायोमास कंट्रोल से बीमारियां होने की संभावना कम हो गई।
यह सफलता गेहूं, मक्का, मूंगफली और लहसुन में मिली। मूंगफली की जड़ों में मौजूद नैनोट्यूब्स से पानी की खपत को तेज करने में भी सफलता मिली।
वैज्ञानिकों का कहना है कि एमडब्ल्यूसीएन का कम मात्रा का इस्तेमाल ही ठीक है।
लखनऊ के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (आईआईटीआर) और डीएवी पीजी कॉलेज कानपुर की लैब में हुई टेस्टिंग से वैज्ञानिकों ने यह जानकारी जुटाई।
वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन बीजों को नैनोट्यूब्स से ट्रीट किया गया। वह तीसरे दिन ही तैयार हो गए। वहीं, उनमें कीड़ा लगने की दर भी काफी कम थी, इसकी वजह से उन्हें सुरक्षित कैटेगरी में रखा गया।