महापौर और पार्षदों केपांच साल के कार्यकाल की गणना कब से की जाएगी यह तय हो गया है। कार्यकाल की गणना शपथ ग्रहण के बाद होने वाली पहली सदन की बैठक से की जाएगी। इसको लेकर प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात की ओर से शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। शासनादेश के हिसाब से महापौर और पार्षदों का कार्यकाल 19 जनवरी तक रहेगा। यदि इससे पहले नगर निगम चुनाव संपन्न हो गया तो ठीक वरना 20 जनवरी से प्रशासक काल लागू हो जाएगा और नगर निगम केसभी अधिकार (नगर निगम सदन और कार्यकारिणी में लिए जाने वाले फैसलों का अधिकार) नगर आयुक्त को मिल जाएंगे।
पिछला नगर निगम चुनाव जीत हार का परिणाम एक दिसंबर 2017 को आया था। उसके बाद 12 दिसंबर 2017 को शपथ ग्रहण हुआ था। शपथ ग्रहण केबाद 19 जनवरी को नगर निगम सदन की पहली बैठक हुई थी। लखनऊ की तरह प्रदेश भर में सभी जगह शपथ तो 12 दिसंबर 2017 को ही हुई थी लेकिन उसके बाद सदन की पहली बैठक सभी जनवरी 2018 में अलग-अलग तिथियों में हुईं। ऐसे में पांच साल के कार्यकाल की गणना कब से की जाए यह तय नहीं हो पा रहा था। जिसको लेकर अब शासन ने तय कर दिया है कि कार्यकाल की गणना शपथ ग्रहण के बाद होने वाली सदन की पहली बैठक से की जाएगी।
20 जनवरी से लागू होगा प्रशासक काल
प्रमुख सचिव नगर विकास द्वारा जारी शासनादेश के तहत महापौर व पार्षदों का कार्यकाल समाप्त होने से पहले यदि चुनाव नहीं हो पाता है तो नगर आयुक्त को सभी अधिकार मिल जाएंगे। ऐसे में दस लाख से अधिक लागत वाले विकास कार्यों की मंजूरी भी नगर आयुक्त दे सकेंगे। अभी दस लाख से अधिक के कार्यों को मंजूरी लिए कार्यकारिणी और सदन में रखा जाता है। जहां से मंजूरी मिलने के बाद आगे काम होता है।