श्रावण मास शुक्लपक्ष की पंचमी ‘नागपंचमी’ रविवार को गली-गली नागराज घूमते फिरेंगे। नागराज गलियों में बजती हुई बीन के साथ दिखाई देंगे तो चौराहों पर रंग बिरंगी डंडियों से गुड़िया पीटी जाएंगी।
सुबह से ही घरों में सर्पाकृति पूजन के बाद शाम को राजधानी और गांव देहात की हर गली-चौराहा गुड़ियों और रंग बिरंगी डंडियों से पट जाएगा।
इस दिन भगवान भोले की पूजा कर नागों को गौदुग्ध पिलाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से भविष्य में सर्पभय नहीं रहता। घर से दरिद्रता दूर भगाने के लिये शाम को चौराहों पर बच्चों द्वारा गुड़िया का भी पीटा जाना शुभ माना जाता है।
आचार्य प्रदीप शास्त्री ने बताया कि रविवार भोर को 4:26 से पंचमी का मान लग जायेगा। इस दिन सूर्योदय के समय स्नान कर घर के मुख्य द्वार पर दोनों ओर गोबर-गौ दुग्ध से तक्षक नाग की सर्पाकृति बनाकर उसकी पूजा करनी चाहिए।
नागपंचमी के दिन सुबह गेंहू और चने की घुघरी का प्रसाद भी चखा जाता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक जिनकी कुंडली में कालसर्प योग का प्रभाव हो, उन्हें नागों को दूध पिलाने के साथ धातु की सर्पाकृति को नदियों में प्रवाहित किया जाना श्रेयस्कर रहता है।
दंगल में लगेंगे दांव, सजेंगे मेले
नागपंचमी गुड़िया के अवसर पर इस दिन राजधानी के तमाम आस-पास के गांवों में दंगल भी खेले जाएंगे। बीकेटी के शिवपुरी, इटौंजा के अमानीगंज और कुम्हरावां के पलिया गांव समेत माल-मलिहाबाद और मोहनलालगंज के कई इलाकों में दंगल खेले जाएंगे।
सदर के अखाड़ों में भी मिट्टी मली जाएगी, जहां पहलवान दांव लगाएंगे। इसके अलावा, नामी शहर के नामी मंदिरों मनकामेश्वर, कोनेश्वर, कल्याण गिरि, मोहनरोड स्थित बुद्धश्वर महादेव मंदिर समेत तमाम शिवालयों में पूजन और बाहर नाग पूजन किया जाएगा, मेले लगेंगे।
उधर, नागपंचमी पर हुसैनगंज-छितवापुर में लगने वाले प्राचीन गुड़िया मेले की भी तैयारियां जोरों पर रही। रात तक मेले में लगने वाले झूले और दुकानें सज रही थीं।
खूब बिकी रंग बिरंगी डंडियां
नागपंचमी के चलते दिनभर शहर के बाजारों में रंग बिरंगी डंडिया खरीदते लोग दिखे। अमीनाबाद, गणेशगंज, कैसरबाग, डालीगंज, चौक, डंडइया, निशातगंज, चिनहट समेत तमाम बाजारों में बच्चों और बड़ों ने मोलभाव कर रंग-बिरंगी डंडिया (बेहया की लकड़ी से बनी) खरीदी।