बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक के बीच नफरत की दीवार खड़ी की जा रही है। धर्म के आधार पर नफरत फैलाकर एक बार फिर देश को बांटने का प्रयास हो रहा है। देश अगर फिर टूटेगा तो सिर्फ धर्म के आधार पर नफरत फैलाने से ही टूटेगा।
हर धर्म प्रेम व भाईचारे का पैगाम देता है, लेकिन इबादतगाहों से दूर बैठे सत्ता के लोभी धर्म की आड़ में आम लोगों की भावनाओं को भड़का कर देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
सेक्युलर देश को हिंदू स्टेट बनाने की कोशिश करने वाले देश के दुश्मन हैं। यह कहना है जमीयत उलमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी का। वे शनिवार को रिफाहे आम क्लब में जमीयत के जलसे को संबोधित कर रहे थे।
मदनी ने यह भी कहा कि अगर यूपी में मुसलमान व अन्य सेक्युलर ताकतें एकजुट नहीं हुईं तो अयोध्या विवाद फिर खड़ा होगा और देश का नुकसान होगा। इसलिए यूपी में एकजुट होकर भाजपा को आने से रोकना होगा।
दंगों से देश का न भला हुआ है न होगा
मदनी ने धर्म को राजनीति से अलग रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि दंगों से न कभी देश का भला हुआ है और न होगा। आज जो विदेशी कंपनियां देश में निवेश को तैयार हैं, वे भी अपनी दुकानें बंद कर भाग जाएंगी। मदनी ने केंद्र की मोदी सरकार से सेक्युलरिज्म बनाए रखने और सांप्रदायिक ताकतों को बेतुके बयान देने से रोकने की अपील की।
केंद्र सरकार पर उठाए सवाल
इससे पहले जमीयत उलमा के प्रांतीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अशहद मदनी ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि कभी ‘घर वापसी’ की हवा चलाई जाती है तो कभी ‘लव जेहाद’ को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की।
जमीयत उलमा के नाजिम मौलाना अब्दुल अलीम फारूकी के अलावा बिशप जितेंद्र, सिख धर्मगुरु हरजीत सिंह व बौद्ध धर्म के धनीराम ने भी अल्पसंख्यकों से एकजुट होकर सांप्रदायिक ताकतों को बेअसर करने की अपील की।
मुसलमानों से किए वादे भूल गई सपा सरकार
अरशद मदनी ने यूपी की सपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि तीन साल बाद भी चुनावी वादे पूरे नहीं हुए।
उन्होंने कहा कि यूपी सरकार सांप्रदायिक दंगा बिल पर शासनादेश लाकर अमन कायम करे और मुसलमानों को आरक्षण देकर उन्नति की राह खोले।
ये प्रस्ताव पास हुए
-राशन कार्ड पर बतौर मुखिया औरतों की तस्वीर का विरोध।
- सांप्रदायिक दंगा बिल का शासनादेश लागू कराए जाने पर जोर।
- निर्दोष मुसलमानों की रिहाई और हाशिमपुरा के निर्दोषों को इंसाफ।