अयोध्या मसले पर विवाद सुलझाने के लिए संतों से मिलकर आपसी सहमति का रास्ता निकालने अयोध्या आए शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी को मुसलमानों ने अपना प्रतिनिधि मानने से इन्कार कर दिया और कहा कि वह खुद इस मसले पर संतों से बात करेंगे। साथ ही ये भी कहा कि मामला कोर्ट में है वहीं, इसका फैसला हो। अगर कोर्ट कह दे तो कल से ही मंदिर निर्माण शुरू हो जाए।
रविवार को संकट मोचन हनुमानगढ़ी मंदिर के बंद कमरे में वार्ता शुरू हुई। जिसमें हिंदू पक्षकार महंत धर्मदास, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी, शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी और बाबरी मस्जिद के मुद्दई इकबाल अंसारी सहित कई लोग शामिल हुए।
इकबाल अंसारी, अचानक बैठक से नाराज होकर निकले और वसीम रिजवी को मुस्लिम पक्षकार मानने से इंकार कर दिया और कहा कि हम उनके फॉर्मूले से सहमत नहीं हैं। रिजवी का पक्ष सुन्नी मुसलमान नहीं मानेगा। वो मुसलमानों के पक्षकार नहीं हैं। बाबरी सुन्नियों की मस्जिद थी। इसलिए वहीं इस मामले के मुद्दई हैं। रिजवी का इसमें कोई दखल नहीं होना चाहिए।
कहा कि अगर रिजवी जैसे लोग बातचीत में शामिल होंगे तो कभी भी मुद्दे का हल नहीं निकलेगा। अंसारी ने कहा कि अब मामला कोर्ट में है वही इसका फैसला करे। अगर कोर्ट कहे तो कल से ही मंदिर बनना शुरू हो जाएगा। इकबाल अंसारी को पिता हाशिम अंसारी की मौत के बाद अयोध्या मामले में मुस्लिम पैरोकार बनाया गया था।
वहीं, वसीम रिजवी का कहना है कि अयोध्या में मंदिर ही बनना चाहिए कि जबकि मस्जिद को किसी अन्य जगह मुस्लिम बस्ती में बना देना चाहिए, लेकिन इस पर मुसलमानों के सभी वर्ग सहमत नहीं हैं।