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तीन तलाक बिल के खिलाफ उमड़ा मुस्लिम महिलाओं का हुजूम, कहा- शरीयत में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं

Mon, 19 Mar 2018 01:50 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रदर्शन करतीं मुस्लिम महिलाएं। - फोटो : amar ujala
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के आह्वान पर रविवार को टीले वाली मस्जिद के मैदान में पहली बार तीन तलाक बिल के खिलाफ मुस्लिम महिलाओं का हुजूम उमड़ा। महिलाओं ने हाथ उठाकर एलान किया कि उन्हें इस्लामी कानूनों में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं है। उन्होंने बिल को शरीयत विरोधी बताकर नामंजूर कर दिया।

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तहफ्फुज-ए-शरीअत मुहिम के तहत आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की महिला विंग की संयोजक डॉ. असमा जहरा ने कहा कि मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन एंड राइट्स इन मैरिज एक्ट-2017 यानि तीन तलाक बिल मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ है। इसको लोकसभा में जल्दबाजी में सियासी उद्देश्यों की पूर्ति के लिए पेश किया गया। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड या किसी अन्य आलिम, महिलाओं की सामाजी संस्था से सुझाव नहीं लिए गए।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 22 अगस्त-2017 में आए फैसले के बाद ऐसे बिल की जरूरत नहीं थी। पर्सनल लॉ बोर्ड की सदस्य ममदूहा माजिद ने कहा कि जेल भेजने के बाद महिलाओं को मेंटेनेंस नहीं मिल पाएगा।
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वहीं, बच्चों की कस्टडी के मामले में बिल में प्रावधान है कि बच्चे मां के पास रहेंगे। ऐसे में गरीब परिवारों पर बच्चों का बोझ बढ़ेगा। बोर्ड की सदस्य निगहत परवीन खां ने कहा कि इस्लामिक कानून में तलाक का कानून भी कुरान और हदीस की बुनियाद पर बना है। आमना रिजवान ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं में 99 फीसदी शरीयत में दखलअंदाजी के खिलाफ हैं।

'पुरुषों के तलाक का हक खत्म करने की हो रही है साजिश'

- फोटो : amar ujala
टीले वाली मस्जिद के इमाम मौलाना शाह फजले मन्नान रहमानी ने कहा कि बिल के जरिए मुस्लिम पुरुषों के तलाक का हक खत्म करने की साजिश हो रही है। बोर्ड कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि बिल के प्रावधान के मुताबिक कोई अनजान व्यक्ति भी तीन तलाक की शिकायत कर सकता है, इसमें पत्नी की शिकायत जरूरी नहीं है।

अगर पत्नी नहीं चाहती है कि पति जेल जाए तो भी किसी दूसरे की शिकायत पर उसको जेल भेज दिया जाएगा। ऐसे में परिवार टूटेंगे और सुलह की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। कार्यक्रम में पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जीलानी, मौलाना जहांगीर आलम कासमी, कारी मोहम्मद सिद्दीक ने केंद्र से बिल वापस लेने की मांग की।

कुरान की आयतों व पर्दानशीं महिलाओं के नारों से गूंजा मैदान
तीन तलाक बिल के खिलाफ जुटीं पर्दानशीं महिलाओं के हुजूम में शरीयत में हस्तक्षेप के खिलाफ नारे लगे। महिलाएं सुबह से ही टीले वाली मस्जिद मैदान में जुलूस की शक्ल में पहुंचना शुरू हो गई थीं। जलसा के पहले मैदान में कुरान की आयतें गूंजीं तो समापन सामूहिक दुआ से हुआ। मदरसों की छात्राओं ने पर्सनल लॉ के समर्थन में तराने सुनाएं तो प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर शरीयत में दखलअंदाजी पर रोक की मांग की गई। जलसे के संयोजक मौलाना नजीबुल हसन सिद्दीकी ने शुक्रिया अदा किया।
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मानव चेन से महिलाओं के लिए बनाया रास्ता

- फोटो : amar ujala
जलसे में शामिल होने आ रहीं महिलाओं के लिए वालेंटियर सड़क से गेट तक मानव चेन बनाकर रास्ता बना रहे थे। जलसे में मीडिया को छोड़ पुरुषों को शामिल होने की इजाजत नहीं थी।

वहीं, मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, जफरयाब जीलानी, मौलाना मुश्ताक, मौलाना शाह फजले मन्नान रहमानी, पूर्व राज्य मंत्री यामीन खान, मोहम्मद शकील सहित तमाम लोग जलसे के दूसरी ओर बने शिविर में बैठाए गए। जलसे में बड़ी संख्या में महिलाओं के शामिल होने के मद्देनजर टीले वाली मस्जिद के बाहर सड़क पर शहर के कई संगठनों व सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से चाय व पानी की सबीलें सजाई गईं।

डॉक्टरों ने लगाया मेडिकल शिविर
मस्जिद की पार्किंग में महिलाओं के लिए मर्सी हास्पिटल व इरम यूनानी मेडिकल कालेज के डाक्टरों ने मेडिकल शिविर लगाया। डॉ. रोशनी सिद्दीकी ने बताया कि जलसे में आईं 50 वर्षीय महिला कनीज फातिमा गिरकर चोटिल हो गईं। उन्हें ट्रामा सेंटर भेज दिया गया। डॉ. अब्दुल कवि ने बताया कि कैंप में ब्लड प्रेशर की जांचकर दवाएं बांटी गईं। शिविर में डॉ. शीबा खान, डॉ. हकीक खान, फार्मासिस्ट ज्ञान प्रिया भी मौजूद रहीं।
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