दरगाह आला हजरत के मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने कहा कि देश को अंग्रेजों से आजाद कराने में सारे देशवासियों ने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। जो लोग आज देश को बांटने का काम कर रहे हैं। यही लोग अपने हिसाब से देश को चलाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान ने सबको समानता का अधिकार दिया है। संविधान किसी को भी अव्वल या दोयम दर्जे का शहरी करार नहीं देता है। हिंदुस्तान का मुसलमान संविधान में दिए गए अधिकार के अनुसार चलता है। हम लोग कौन छोटा है और कौन बड़ा है, इसमें नहीं बल्कि बराबरी में विश्वास रखते हैं।
मुसलमानों ने वर्चस्व कायम करने में की नहीं की कोशिश
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्य एवं ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि मुसलमानों ने देश की आजादी में अपनी जान और माल की कुर्बानियां देने के बाद भी अपने वर्चस्व को कायम करने के लिये कभी कोई कदम नही उठाया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद मुसलमानों ने अपना सियासी लीडर हमेशा हिंदू भाई को ही बनाया।
मरकजी शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि मुसलमान कभी भी वर्चस्व की बात नही करता है। अगर किसी समुदाय को ऐसा लग रहा है तो ये उनके दिल के भीतर की बात है क्योंकि मुसलमानों के शासन करने की बात इतिहास में दर्ज है जिसे बदला नही जा सकता है।
सपा सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क ने संघ और भाजपा पर निशाना साधते हुए देश के हालात खराब करने और नफरत का माहौल पैदा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मुसलमान किसी से नहीं डरते हैं और केवल देश की तरक्की चाहते हैं। देश को आगे बढ़ता हुआ देखना चाहते हैं।