मदरसों में तिरंगा फहराने को लेकर हाईकोर्ट इलाहाबाद के आदेश का सभी ने स्वागत किया है। साथ ही कहा है कि आजादी से अब तक मदरसों में झंडा फ हराया जाता रहा है क्योंकि देश की आजादी में मदरसों का अहम रोल रहा है। बाकी जिन इमारतों व संगठनों द्वारा झंडा रोहण नहीं किया जाता, उनको निर्देश देने से बेहतर है कि कार्रवाई की जाए। अमर उजाला ने इस मसले पर कुछ मुस्लिम धर्म गुरुओं से बात की-
तिरंगे का सम्मान करना हर भारतीय का फर्ज
इस पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. कल्बे सादिक का कहना है कि भारतीय तिरंगे का सम्मान करना हर भारतीय का फर्ज है। देश में रहने वाला हिन्दू हो या मुसलमान सबकी पहचान इसी तिरंगे से है। फिर जो अपने देश की पहचान से दूर हो जाएगा वह अपने देश से भी दूर हो जाएगा। कोई शक नहीं कि मदरसों में तिरंगा पूरे सम्मान के साथ फहराया जाता है। इसके लिए भारतीयों को किसी आदेश की जरूरत नहीं है।
फरमान जारी करने का कोई मतलब नहीं
वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि भारतीय तिरंगा हर भारतीय के लिए गर्व व सम्मान का परचम है। मदरसों में हमेशा तिरंगा फहराया जाता रहा है क्योंकि आजादी की नींव ही मदरसों में रखी गई और मदरसों के उलमा का आजादी में बराबर का योगदान रहा। ऐसे में मदरसों में तिरंगा फहराने का फरमान जारी करने का कोई मतलब नहीं है। जो नहीं फहराते उन पर सीधे कानूनी कार्रवाई की जाए।