एक बार में तीन तलाक देकर रिश्ते खत्म करने के मामले में बहस छिड़ने के बाद शहरकाजी मौलाना आलम रजा खां नूरी और मुफ्ती मौलाना मोहम्मद हनीफ बरकाती ने बताया कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद (सअ) ने तीन तोहर (तीन पीरियड के बाद का समय) में ही एक-एक कर तीन बार तलाक देने का सही तरीका बताया है।
अगर कोई शख्स एक बार में ही तीन तलाक देता है तो तलाक हो जाएगा लेकिन यह तरीका ठीक नहीं है। इस तरह तलाक देने वाले पर तौबा वाजिब हो जाएगा। क्योंकि उसने नबी के बताए तरीके के खिलाफ काम किया है।
बताया कि उनके पास अभी तक ऐसी कोई दलील नहीं आई है जिसमें यह कहा गया हो कि एक बार में तीन तलाक को सिर्फ एक माना जाए। वह गुरुवार को रजबी रोड स्थित गुलाम कादिर हाल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
'तीन महीने तक दूर नहीं रह सकते पति-पत्नी'
मुफ्ती हनीफ ने बताया कि अल्लाह के नजदीक जायज चीजों में सबसे नापसंद तलाक है। उन्होंने कहा कि इमामे शाफई, इमामे मालिक, इमामे आजम, इमाम अहमद का यही मानना है कि एक बार में तीन तलाक देने से रिश्ते खत्म हो जाते हैं।
अगर लोग नबी के बताए तरीके के मुताबिक तलाक दें तो तमाम परिवार टूटने से बच जाएंगे। इसमें बीवी की पाकी की इसीलिए शर्त रखी है। तीन महीने मियां-बीवी अलग नहीं रह सकते हैं। इस दौरान उनमें ताआल्लुकात हो जाएंगे तो तलाक की बात खत्म हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस तरह से लोगों को तलाक देने के बारे में अब जागरूक किया जाएगा। इसके लिए मस्जिदों में भी इमाम तकरीरें करेंगे। मौलाना नूरी ने कहा कि जिन सात मुस्लिम मुल्कों में एक साथ तीन तलाक को एक मानने की बात कही जा रही है उन मुल्कों के उलमा से भी इस बारे में जानकारी हासिल की जाएगी।
गुस्से में नहीं दिया जा सकता तलाक
गुस्से और होशोहवाश में न होने पर तलाक नहीं माना जाता है। तलाक देने वाले को यह मालूम होना चाहिए कि वह तलाक दे रहा है। तलाक देने के बाद इद्दत (तीन महीने का समय) में पति अपनी पत्नी को रुजू यानी मना सकता है। अगर इससे ज्यादा का वक्त निकल गया तो उसे दोबारा निकाह करना होगा।
तलाक औरत की पाकी की हालत में दिया जाता है। अगर औरत कहीं बाहर रह रही हो तो अलग-अलग वक्त में तीन बार तलाक देना होगा।
मौलाना अलमदार हुसैन, इमामे जुमा, शिया जामा मस्जिद जूही,कानपुर