मुसलिम समाज में ‘तीन तलाक’ से टूट रही रिश्तों की डोर को बचाने की कवायद शुरू हो गई है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अखिल भारतीय इस्लामिक अकादमी ने मुफ्तियों के पैनल का गठन किया है।
नायब शहरकाजी और इल्मी अकादमी के अध्यक्ष मौलाना मतीनुल हक ओसामा ने बताया कि एक साथ तीन तलाक को शरीयत में अच्छा अमल नहीं समझा गया है। इसके बावजूद जब मियां-बीवी में रिश्ता निभाना नामुमकिन हो जाए तो तीन तलाक के बजाय एक तलाक ही दिया जाए।
इस एक तलाक में भी तलाक-ए-रजयी को प्राथमिकता दी जाए। बाद में तलाक-ए-बायन को चुना जाए। दोनों तरह से एक बार में एक ही तलाक दिया जाए। इसके बाद सुलह होने पर रिश्ता दोबारा कायम हो सकता है।