सितार, बांसुरी, जलतरंग और तबले की थाप के साथ 29 छात्र और शिक्षकों से सजा मंच। छात्रों के हाथों में लहराती वायलिन की मंत्रमुग्ध करती तान। एक साथ बजते साजों पर 17 छात्रों की आवाज।
दृश्य ने ऐसा जादू बांधा कि अगले 15 मिनट के लिए पूरा प्रेक्षागृह थम सा गया। जो जहां बैठा वहीं बैठा रह गया। संगीत के शौकीन इस कदर खोये कि उन्हें ना खुद का होश रहा और न अपने पड़ोस में बैठे लोगों का।
मौका था गोमतीनगर स्थित संत गाडगे जी प्रेक्षागृह में बुधवार शाम तीन दिवसीय भातखंडे जयंती संगीत समारोह-2014 की शुरुआत का।
समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि अतिथि राज्यपाल राम नाईक ने भातखंडे प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन से की। उन्होंने कहा कि अब भातखंडे संगीत विवि लखनऊ की शान बन चुका है।
पंडित भातखंडे की प्रेरणा से जो बीज तोप वाली गली में बोया गया आज वो वटवृक्ष बन चुका है और पूरे हिंदुस्तान में संगीत की छटा बिखेर रहा है। दुनिया में भारतीय संगीत की विशेषता है।
लखनऊ वालों को इस बात पर गर्व होना चाहिए कि संगीत विवि हमारे लखनऊ में है। शाम का पहला आकर्षण मंच पर एक साथ आये 29 छात्रों-शिक्षकों की भातखंडे कृति ने चुराया।
डॉ. सृष्टि माथुर, डॉ. कमलेश दुबे के निर्देशन में छात्रों ने राग बागेश्री एक ताल और सरगम गीत तीन ताल में चतुर सुजन राग कहत.. पर प्रस्तुति से दिल जीता।