ट्रेन से फेंकी गईं बच्चियों ने अपनी नानी को सामने पाकर उन्हें गले लगाकर खूब रोई। जिसने भी देखा, उसकी आंखें भर आई। शनिवार सुबह जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में कुछ ऐसा ही दृश्य देखने को मिला। जहां मौत को मात देकर आई दो बहनों का इलाज चल रहा है।
इन बहनों ने जैसे ही अपनी नानी को देखा, फफक कर रो पड़ी। पूरा का पूरा वार्ड इस मिलन को देख भावुक हो उठा था। बता दें कि गत सोमवार की रात कामाख्या ट्रेन में सफर के दौरान बेतिया जिले के पहाड़पुर थाना क्षेत्र के सरिया बाजार निवासी इद्दू की पत्नी अफरीना, पुत्री रबिया, हसीना, अल्बुल खातून, मुन्नी व सलीमा को चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया था।
जिसमें अफरीना व उसकी पुत्री मुन्नी के शव बरामद हुए। जबकि हसीना का पता नहीं चल सका। रबिया, अल्बुल खातून व सलीमा मौत को मात देने में कामयाब रहीं। अल्बुल खातून व सलीमा सीतापुर जिला अस्पताल में भर्ती हैं।
जबकि रबिया का लखनऊ में इलाज चल रहा है। इन्ही दोनों बहनों का हाल जानने के लिए शनिवार की सुबह इन बच्चियों की नानी, बिहार के बेतिया जिले के नौतन थाना क्षेत्र के ग्राम झखरा निवासी नाजिया उर्फ रबिया (७०) सीतापुर पहुंची। जीआरपी के जवान बुजर्ग नानी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे।
यहां पर जैसे ही बुजुर्ग रबिया ने इमरजेंसी वार्ड में कदम रखा। वार्ड में भर्ती अल्बुल व सलीमा नानी नानी कहकर रोने लगी। नानी ने भी एक पल की देरी नहीं की और दौडक़र बेड पर पहुंची और अल्बुल व सलीमा को गले से लगाकर रोने लगी। इसी बीच अल्बुल बोली, नानी अम्मी छोड़ के चली गई, हमका घर ले चलो।
नानी ने बच्चियों के आंसू पोंछते हुए कहा, कि अब चिंता न करो, अब दोनों को घर लेकर ही चलब। काफी देर तक दोनों बच्चियों अपनी नानी के सीने से लगकर गिले शिकवे क रती रहीं। नानी भी बच्चियों को ढांढस बंधा रही थी, कि अब वह आ गई है, बच्चियों को कुछ भी नहीं होने देगी।
नानी व दो नातिन की आंखों से इस कदर आंसू बहे कि, वार्ड में मौजूद हर कोई गमगीन हो उठा। सभी की आंखे भर आईं।