प्रत्यक्षदर्शी चरवाहों ने बताया कि गोली लगने के बाद भी बाइक सवार युवक चलता रहा। वह करीब 40 मीटर तक चला, फिर बाइक रोकी। बाइक स्टैंड पर खड़ी करने के बाद उसने हेलमेट उतारकर हैंडल पर लगाया और सड़क पर बैठ गया। कुछ देर बैठे रहने के बाद वह लुढ़क गया।
राहुल की हत्या के पीछे पारिवारिक रंजिश को कारण बताया जा रहा है। घरवालों ने बताया कि सभी लोग पहले उन्नाव में रहते थे। वहां रहने वाले एक परिवार से उनकी दुश्मनी थी। दूसरे पक्ष ने राहुल के पिता को हत्या के एक मामले में फंसाकर जेल भेज दिया था।
इसके जवाब में राहुल के घरवालों ने परिवार के एक सदस्य को फर्जी दस्तावेज के आधार पर सरकारी नौकरी लेने का खुलासा कर उसे बर्खास्त करा दिया था। रंजिश किस बात को लेकर थी? यह फिलहाल पता नहीं चल सका है।
राहुल के पिता अजय पाल ने उन्नाव के निहालखेड़ा में रहने वाले पड़ोसी तेज बहादुर, उनके बेटे लोकेन्द्र प्रताप, मानवेन्द्र सिंह, पप्पू सिंह, शिवशशंकर वर्मा के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई है। जिस तरह से वारदात हुई उससे लग रहा है कि हत्यारों ने राहुल के रास्ते को अच्छी तरह से रेकी की थी। वह कई दिन से उसके पीछे लगे होंंगे।
पुलिस ने बताया कि राहुल ने अंतिम फोन राजमिस्त्री को किया था। वे करीब 20 दिन से पीजीआई के सरस्वतीपुरम में अपना मकान बनवा रहे ते। वह बैंक से निकलते ही मकान का निर्माण करने वाले मिस्त्री को कॉल करके बातचीत करते और अपने आने की जानकारी देते।
शुक्रवार को भी बैंक से निकलते ही उन्होंने मिस्त्री को कॉल करके कुछ देर वहां पुहंचने की बात कही थी। राहुल की बेटी अवनि ठीक से बोल नहीं पाती है। परिवारीजनों ने बताया कि वह बेटी का किसी बड़े अस्पताल में उपचार कराना चाहते थे।
इसी वजह से उन्होंने बैंक अधिकारियों से लखनऊ ट्रांसफर करने की बात कही थी। कैशियर राहुल सिंह की मौत की जानकारी पाकर उनके बड़े भाई व पंजाब नेशनल बैंक की साउथ सिटीशाका में बतौर कैशियर तैनात रोहित सिंह समेत अन्य परिवारीजन मौके पर पहुंच गए।
रोहित ने बताया कि राहुल पहले रायबरेली में तैनात था। छह महीने पहले ही उसका तबादला लखनऊ हुआ और वह पत्नी बेटी के साथ यहां आ गया। उसके पिता अजय पाल सिंह व दो अन्य बड़े भाई विमल व कमल रायबरेली में ही रहते हैं।