पत्नी डॉ. जागृति सिंह के साथ नौकरानी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार सांसद धनंजय सिंह की मुश्किलें बढ़ने के आसार बने हुए हैं।
दिल्ली पुलिस ने धनंजय के आपराधिक इतिहास को खंगालना शुरू कर दिया है।
इसके लिए दिल्ली पुलिस ने यूपी पुलिस के अफसरों से सहयोग मांगा है।
दिल्ली पुलिस ने यह कवायद धनंजय के खिलाफ दर्ज मुकदमे में अपना विधिक पक्ष मजबूत करने के नजरिए से उठाया है।
दिल्ली पुलिस धनंजय के आपराधिक इतिहास को अदालत के समक्ष रखते हुए, नौकरानी के कत्ल में सांसद व उनकी पत्नी की भूमिका होने के आरोप को पुख्ता करना चाहती है।
मामला सांसद का होने की वजह से हालांकि, औपचारिक तौर पर राज्य के पुलिस अधिकारी यह स्वीकार नहीं कर रहे हैं कि दिल्ली पुलिस ने उनसे लिखित तौर पर ऐसी कोई जानकारी चाही है।
लेकिन सूत्रों का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने यूपी पुलिस के अफसरों से फोन पर संपर्क कर उनसे धनंजय के मामले में जानकारी मुहैया कराने में सहयोग की अपेक्षा की है।
30 मुकदमे दर्ज थे धनंजय पर
अभी तक धनंजय सिंह पर उत्तर प्रदेश के जौनपुर से लेकर लखनऊ जिले तक में सनसनीखेज वारदात के 30 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
इनमें से 28 मामलों में धनंजय अदालत से बरी हो चुके हैं। जिन मुकदमों में कार्रवाई समाप्त हुई है, उनमें ज्यादातर में या तो गवाह मुकर गए या फिर पुलिस की विवेचना इतनी लचर रही कि अदालत में इसका लाभ मिल गया।
सनसनीखेज हत्याएं, जिनमें आया नाम
छात्र जीवन से ही माफिया बनने वाले धनंजय पर लखनऊ और पूर्वांचल में कई सनसनीखेज अपराधों में शामिल होने का आरोप लग चुका है।
इनमें 1997 में लामार्टीनियर कालेज के स्पोर्ट्स टीचर फ्रेड्रिक गोम्स की अल सुबह घर में घुस कर हत्या, 1998 में लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर गोपाल नारायण श्रीवास्तव की हत्या, वर्ष 2000 में हजरतगंज में स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. बच्चीलाल का कत्ल में नाम आ चुका है।
इसके साथ ही पिछले विधान सभा चुनाव के दौरान जौनपुर में एक प्रत्याशी सोनकर की हत्या, एनआरएचएम घोटाले में लखनऊ जेल में बंद डिप्टी सीएमओ डॉ. वाईएस सचान की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के पीछे भी धनंजय का हाथ होने की चर्चा रही पर इसे साबित नहीं किया जा सका।
ऐसे एक नहीं कई मामले हैं, जिनमें धनंजय सिंह का नाम आता रहा, पर साक्ष्यों व गवाहों के अभाव में उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी।
मौजूदा समय में जौनपुर के केराकत थाना क्षेत्र में अप्रैल 2010 को ठेकेदार संजय निषाद और नंदलाल निषाद की दोहरी हत्या का ही एकमात्र मामला ऐसा है, जिसमें धनंजय सिंह को राहत नहीं मिल सकी है।
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