कन्नड़ विद्वान एमएम कलबुर्गी की हत्या व सांप्रदायिक सदभाव में कमी के विरोध में कई साहित्यकारों के पुरस्कार व नागरिक सम्मान लौटाने पर मशहूर शायर मुनव्वर राना ने कहा, इसका मतलब है कि आप थक चुके हैं। अपनी कलम पर भरोसा नहीं है।
केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए देश भर में बड़ी संख्या में साहित्यकार साहित्य अकादमी पुरस्कार और नागरिक सम्मान लौटा रहे हैं, लेकिन राजधानी के मशहूर शायर मुनव्वर राना ने विरोध के इस तरीके पर सवाल उठाया है।
राना कहते हैं, लेखक का काम समाज को सुधारना है। हमें समाज की चिंता करनी चाहिए। अपनी पुस्तक ‘शाहदाबा’ के लिए 2014 में साहित्य अकादमी पुरस्कार (उर्दू भाषा) से सम्मानित मुनव्वर राना ने मंगलवार को ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि अगर आप सम्मान लौटा रहे हैं तो इसका मतलब है कि आप थक चुके हैं।