सम्मान लौटाने वाले साहित्यकारों को थका हुआ बताने वाले प्रसिद्ध शायर मुनव्वर राना ने रविवार को दिल्ली जाकर यू-टर्न लेते हुए अपना साहित्य अकादमी सम्मान लौटा दिया। कहा, सम्मान न लौटाने वाले साहित्यकारों को सत्ता का चाटुकार समझा जा रहा है। राना ने यह भी एलान किया है कि वे जीवन में अब कभी कोई सरकारी सम्मान नहीं लेंगे।
उन्होंने एक टीवी चैनल की बहस के दौरान सम्मान लौटाने की घोषणा की। राना को उनकी पुस्तक ‘शाहदाबा’ के लिए 2014 के साहित्य अकादमी सम्मान (उर्दू ) से सम्मानित किया गया था।
अपना सम्मान चिह्न और एक लाख रुपए की राशि लेकर पहुंचे राना ने यह भी कहा कि वे पाकिस्तान जाने वाला थे, लेकिन यह यात्रा इस कारण रद कर दी कि कहीं उनके फैसले को इस यात्रा से जोड़कर न देखा जाय। उन्होंने इस मौके पर एक शेर भी सुनाया- ‘मेरी खुद्दारी ने एहसान किया है मुझ पर, वरना जो जाते हैं दरबार में खो जाते हैं‘।
मुनव्वर ने यह भी कहा
‘मैं रायबरेली का रहने वाला हूं। सत्ता हमारी शहर की नालियों में बहकर दिल्ली पहुंचती थी। जब दादरी की घटना हुई, मैं दोहा में था। मैंने फेसबुक पर इसे आतंकी घटना कहा तो मुझ पर चारों ओर से हमले होने लगे। ... इस देश में बिजली के तार नहीं जोड़े जा पाते, लेकिन मुसलमानों के तार न जाने किससे-किससे जोड़ दिए जाते हैं।’