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मुनव्वर राणा का यू टर्न, लौटाया अकादमी अवार्ड

Mon, 19 Oct 2015 02:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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सम्मान लौटाने वाले साहित्यकारों को थका हुआ बताने वाले प्रसिद्ध शायर मुनव्वर राना ने रविवार को दिल्ली जाकर यू-टर्न लेते हुए अपना साहित्य अकादमी सम्मान लौटा दिया। कहा, सम्मान न लौटाने वाले साहित्यकारों को सत्ता का चाटुकार समझा जा रहा है। राना ने यह भी एलान किया है कि वे जीवन में अब कभी कोई सरकारी सम्मान नहीं लेंगे।
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उन्होंने एक टीवी चैनल की बहस के दौरान सम्मान लौटाने की घोषणा की। राना को उनकी पुस्तक ‘शाहदाबा’ के लिए 2014 के साहित्य अकादमी सम्मान (उर्दू ) से सम्मानित किया गया था।

अपना सम्मान चिह्न और एक लाख रुपए की राशि लेकर पहुंचे राना ने यह भी कहा कि वे पाकिस्तान जाने वाला थे, लेकिन यह यात्रा इस कारण रद कर दी कि कहीं उनके फैसले को इस यात्रा से जोड़कर न देखा जाय। उन्होंने इस मौके पर एक शेर भी सुनाया- ‘मेरी खुद्दारी ने एहसान किया है मुझ पर, वरना जो जाते हैं दरबार में खो जाते हैं‘।
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मुनव्वर ने यह भी कहा
‘मैं रायबरेली का रहने वाला हूं। सत्ता हमारी शहर की नालियों में बहकर दिल्ली पहुंचती थी। जब दादरी की घटना हुई, मैं दोहा में था। मैंने फेसबुक पर इसे आतंकी घटना कहा तो मुझ पर चारों ओर से हमले होने लगे। ... इस देश में बिजली के तार नहीं जोड़े जा पाते, लेकिन मुसलमानों के तार न जाने किससे-किससे जोड़ दिए जाते हैं।’
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अवार्ड लौटाना यानी अपनी कलम पर भरोसा नहीं

मुनव्वर राना ने 13 अक्तूबर को ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा था कि लेखक का काम समाज को सुधारना है। हमें हुकूमत की नहीं, समाज की चिन्ता करनी चाहिए। अगर आप सम्मान लौटा रहे हैं, तो इसका अर्थ यह है कि आप थक चुके हैं। आपको अपनी कलम पर भरोसा नहीं है।

लाख-डेढ लाख रुपए का सम्मान लौटाना बड़ी बात नहीं है, यह तो बहुत मामूली बात है। बड़ी बात यह है कि आप अपनी रचनाओं के माध्यम से सुधारे। जिन घटनाओं के विरोध में सम्मान लौटाए जा रहे हैं, वे समाज के अलग-अलग समूहों ने की हैं। हमारा विरोध समाज के उन लोगों से है, न कि हुकूमत से है।

पहले भी लौटाए गए हैं पुरस्कार
रवीन्द्रनाथ ठाकुर : 1919 में जलियावाला हत्याकाण्ड के विरोध में नाइटहुड की उपाधि। ब्रिटिश सरकार की इस उपाधि के बाद नाम के आगे सर लिखा जाता है।

फणीश्वरनाथ रेणु : 1975 में आपातकाल के विरोध में पद्मश्री।
खुशवन्त सिंह : 1984 में आपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में पद्मभूषण।
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