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सपा में खिंचीं तलवारें, मुलायम-अखिलेश ने बुलाई अलग-अलग बैठकें

Mon, 27 Mar 2017 07:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव - फोटो : amar ujala
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सपा में एकाएक सियासी हलचल तेज हो गई है। इसकी वजह यह है कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 28 मार्च को सवेरे विधानमंडल दल की बैठक आहूत की है तो 29 मार्च की शाम को सपा के संस्थापक अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने नवनिर्वाचित विधायकों की मीटिंग बुलाई है।
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विधानमंडल दल की बैठक में नेता और अन्य पदाधिकारियों का चुनाव किया जा सकता है। वहीं, मुलायम नए विधायकों से राजनीतिक हालात पर चर्चा करेंगे।

सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की शनिवार को हुई बैठक में मुलायम व शिवपाल यादव को न बुलाने से राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। पिछले 25 वर्षों में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की यह पहली बैठक थी जिसमें मुलायम सिंह मौजूद नहीं थे।

इस बैठक में उनका नाम तक नहीं लिया गया। पार्टी की हार के बावजूद मुलायम के बयान संतुलित रहे हैं। शिवपाल ने कहा था कि यह घमंड की हार है, वहीं मुलायम कह चुके हैं कि चुनाव में पराजय के लिए कोई एक व्यक्ति जिम्मेदार नहीं होता।
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चुनाव परिणाम आने के बाद मुलायम सिंह ने पहली बार 29 मार्च को शाम 6 बजे नवनिर्वाचित विधायकों को अपने विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास पर बुलाया है। वे विधायकों से चुनावी नतीजों व मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा करेंगे। वह विधायकों को रात्रि भोज भी देंगे। माना जा रहा है कि विधानसभा में विधायक दल के नेता को लेकर भी वह बातचीत कर सकते हैं।

शपथ ग्रहण से पहले ही चुन लिया जाएगा नेता

उधर, मुलायम से पहले अखिलेश यादव ने 28 मार्च को सवेरे नौ बजे सपा के प्रदेश मुख्यालय में विधानमंडल दल की बैठक बुलाई है। इसमें सभी नवनिर्वाचित विधायकों और विधान परिषद सदस्यों को आमंत्रित किया गया है।

28 मार्च से ही विधायकों का शपथ ग्रहण प्रारंभ हो रहा है। ऐसी संभावना है विधानभवन में शपथ ग्रहण शुरू होने से पहले ही सपा विधानमंडल दल के नेता का चुनाव कर लिया जाएगा।

विधानसभा और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष कौन होंगे, यह 28 मार्च को सवेरे ही तय हो जाएगा। इसके अलावा दोनों सदनों में उपनेता, मुख्य सचेतक, सचेतक व अन्य पदाधिकारियों का भी चुनाव कर लिया जाएगा। मुलायम द्वारा विधायकों की बैठक बुलाने से पहले ही विधानमंडल दल के नेता के चयन की कसरत पूरी कर ली जाएगी।
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अखिलेश व मुलायम की पसंद अलग-अलग

विधानसभा में सपा विधायक दल का नेता ही प्रतिपक्ष का नेता होगा। इस पद के लिए सपा में जोड़तोड़ चल रही है। सूत्रों के मुताबिक मुलायम सिंह की पसंद जहां आजम खां या शिवपाल हैं वहीं अखिलेश यादव, राम गोविंद चौधरी या आजम में से किसी एक को इस पद पर देखना चाहते हैं।

हालांकि, ज्यादा संभावना राम गोविंद को विधायक दल का नेता बनाए जाने की है। सपा विधायक दल की बैठक में नेता के चयन का अधिकार अखिलेश यादव को सौंपा जा चुका है।

विधान परिषद में अखिलेश खुद भी सपा विधायक दल के लीडर और नेता प्रतिपक्ष हो सकते हैं। वह यह जिम्मेदारी किसी और को भी सौंप सकते हैं।

उधर, आजम खां शनिवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में गैरहाजिर रहे, इसके भी मायने निकाले जा रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष के चयन से पहले उन्होंने पार्टी नेतृत्व का ध्यान अपनी तरफ खींचा है।
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