बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के बड़े भाई और पूर्व सांसद अफजाल अंसारी ने सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार में शामिल कुछ खास लोगों के दबाव में मुख्तार को जबरन पीजीआई से डिस्चार्ज कर दिया गया है, जबकि उनकी सेहत अभी भी ठीक नहीं है।
उन्होंने कहा कि पीजीआई में कराई गई जांच रिपोर्ट में भी मुख्तार को हार्टअटैक होने की पुष्टि हुई है। डॉक्टरों ने उन्हें बेड रेस्ट व सड़क मार्ग से सफर न करने की भी सलाह दी है।
इसके बावजूद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज करके 300 किमी. दूर बांदा जैसे पिछड़े इलाके में स्थित जेल में दाखिल करा दिया गया है। आखिर ऐसा किसके दबाव में किया गया है, इसकी सरकार को जांच करानी चाहिए।
अफजाल शुक्रवार को अपने लखनऊ स्थित आवास पर मुख्तार के छोटे बेटे उमर अंसारी की मौजूदगी में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्तार का बेहतर इलाज करने के लिए उन्होंने खुद मुख्यमंत्री से अनुरोध किया था, उन्होंने आश्वासन भी दिया था।
इसके बावजूद पीजीआई में मुख्तार का 24 घंटे भी इलाज नहीं होने दिया गया। उन्होंने कहा कि सामान्य स्थिति में भी किसी मरीज को इतनी जल्दी डिस्चार्ज नहीं किया जाता है।
उन्होंने कहा कि बांदा जेल में अपनी पत्नी के साथ मुलाकात के दौरान बेहोश होने पर मुख्तार के मुंह से जिस प्रकार से झाग निकल रहा था और उनकी आंखे उलट गई थी। इसके बाद भी उन्हें माइनर हार्टअटैक बताकर इलाजा किया गया है। अगर हार्ट अटैक ही था तो उन्हें 24 घंटे के भीतर कैसे डिस्चार्ज किया गया।
उन्होंने पीजीआई में हुए ईलाज पर भी सवाल उठाया। कहा, जिस समय मुख्तार को पीजीआई में दाखिल किया गया था। उस समय वहां कार्डियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. गोयल से खुद उनकी बात हुई थी। उस समय डाक्टर ने बताया था कि उनका एंजियोग्राफी व एंजियोप्लास्टि करने की बात कही थी।
एकाएक एक घंटे के बाद जब पीजीआई पहुंचे तो डाक्टरों ने बताया कि मुख्तार की धमनी के मुख्य नलियों में कोई दिक्कत नहीं है। इसलिए उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है।
अफजाल ने आरोप लगाया कि वहां तैनात पुलिस के अधिकारियों की सलाह पर वहां के डॉक्टर भी पल-पल बयान बदल रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर हार्ट अटैक ही था तो उन्हें डिस्चाज करने में जल्दबाजी करना पूरी चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले की जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी तो वह इस मसले को कोर्ट में भी ले जाएगें। बांदा जेल में मुख्तार को रखे जाने पर भी सवाल उठाते हुए अफजाल ने कहा कि बांदा में मुख्तार के खिलाफ एक भी मुकदमा नहीं है, फिर भी वहां रखे जाने की वजह सरकार को बताना चाहिए।