ज्योषिचार्य पं. राकेश पांडेय ने बताया कि रक्षाबंधन के दिन कुल पुरोहित अपने यजमान को, बहनें अपने भाई को रक्षासूत्र बांध तिलक लगाकर चिरंजीवी व सर्वत्र विजयी होने की कामना करती हैं। येन बद्धो बली राजा दान वेंद्रो महा बल: तेन त्वां प्रति बद्धनामि रक्षे माचल माचल.. मंत्र से रक्षासूत्र बांधना श्रेष्ठ माना गया है। रक्षाबंधन के पूर्व गणेश जी का स्मरण करके ही बहनें अपने भाई को राखी बांधें।
कहते हैं कि इसी मंत्र से प्राचीन काल में द्रोपदी ने श्री कृष्ण को, देव गुरु बृहस्पति ने इंद्र को रक्षासूत्र बांधा था। इसी दिन श्रावणी का उपाकर्म ब्राह्मणों द्वारा किया जाता है। जिसमे वेद पाठी व्राह्मण यज्ञोपवीत की शुद्धि करते हैं। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक रक्षा बाँधने का विशेष मुहूत..सुबह 5:40 से 11:43 तक और दोपहर 2 बजे से 4:16 तक भी है।
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक राशियों के अनुरूप राखी बांधी जाये, तो शुभकारक रहेगा।
मेष-- लाल, गुलाबी या पीले रंग की।
वृष-- श्वेत, नीली, रेशमी-चमकीली।
मिथुन--हरी, नीली, गुलाबी।
कर्क--श्वेत, पीली, चमकीली-रेशमी।
सिंह--लाल, गुलाबी या पीली।
कन्या-- श्वेत, हरी, गुलाबी।
तुला-- श्वेत, नीली-चमकीली।
वृश्चिक-- लाल, गुलाबी या पीेली।
धनु-- पीली, लाल या गुलाबी।
मकर-- नीली, चमकीली-श्वेत।
कुंभ-- श्वेत-नीले रंग की।
मीन-- पीली या गुलाबी।