दूसरी ओर सांसद कौशल किशोर का कहना है कि आयुष से उम्र में बड़ी युवती ने उसे जाल में फंसाकर शादी की है। उनका कहना है कि आदर्श ने खुद ही आयुष को गोली मारी है। इसमें आयुष का कोई हाथ नहीं है। सांसद का कहना है कि घटना के बाद ट्रॉमा सेंटर पहुंचे एसीपी व डीसीपी ने जब आयुष से पूछताछ की तो उसने सिर्फ इतना ही कहा कि पीछे से गोली चलाई गई थी। इस वजह से वह हमलावरों को नहीं देख सका। यदि आयुष को किसी को फंसाना होता तो भला वो उन लोगों के नाम क्यों न लेता। वह क्यों कहता कि हमलावरों को देख नहीं सका।
सांसद का कहना है कि बेटे ने जिस दिन से अपनी मर्जी से शादी की थी, उसी दिन से उससे कोई मतलब नहीं है। जब बेटे से ही कोई मतलब नहीं तो भला बहू से क्या लेना-देना। सांसद का कहना है कि उनसे व उनके परिवार से बहू को कोई खतरा नहीं है। किसी और से कोई खतरा हो तो उन्हें मालूम नहीं।