बहराइच के मोतीपुर रेंज में घायल मिली लड़की जिसने मोगली गर्ल के नाम से विदेश तक में सुर्खियां बटोरीं उसे बहराइच में वन दुर्गा नाम दिया गया। वन दुर्गा अब फिजिकली तौर पर फिट है, लेकिन वह मानसिक रूप से पूरी तरह अक्षम है। शुक्रवार को अस्पताल प्रशासन ने बाल कल्याण समिति कोर्ट पर पेश होकर उसकी रिपोर्ट सौंपी।
इस पर बाल कल्याण समिति ने वन दुर्गा को विशेष बाल गृह लखनऊ भेजने की अनुमति दे दी है। वहां पहुंचने के बाद उसका इलाज शुरू होगा। वन दुर्गा को शनिवार को सुबह चाइल्ड लाइन की टीम महिला पुलिस सुरक्षा के साथ एंबुलेंस से लखनऊ ले जाएगी।
जंगल में सड़क के किनारे ढाई माह पूर्व लहूलुहान हालत में मिली किशोरी को गुरुवार देर शाम जिलाधिकारी अजयदीप सिंह ने वन दुर्गा नाम दिया। इसके बाद उसे लखनऊ ले जाने के निर्देश दिए। उसी के तहत शुक्रवार को सुबह वन दुर्गा को लखनऊ ले जाने की कवायद शुरू हुई।
मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. डीके सिंह, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा और चाइल्ड लाइन के निदेशक डॉ. जीतेंद्र चतुर्वेदी ने बाल कल्याण समिति के समक्ष वन दुर्गा की रिपोर्ट पेश की।
रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. राधेश्याम वर्मा ने समिति के सदस्यों से विचार विमर्श करके वन दुर्गा को इलाज और देखभाल के लिए लखनऊ के जानकीपुरम में स्थित विशेष बाल गृह ले जाने की अनुमति दे दी।
शनिवार को सुबह चाइल्ड लाइन की टीम, दो महिला सिपाही की सुरक्षा में अस्पताल में भर्ती वन दुर्गा को एंबुलेंस से लखनऊ ले जाएगी। इसकी तैयारियों में अस्पताल प्रशासन जुटा हुआ है।
परिवार का नहीं चल सका पता
मोगली गर्ल
अस्पताल में भर्ती वन दुर्गा के परिवार का पता नहीं चल सका है। ऐसे में उसे विशेष बाल गृह भेजा जा रहा है। जानकीपुरम में यह बालगृह स्थापित है।
जिसका संचालन दृष्टि सामाजिक संस्था द्वारा किया जाता है। यह सेंटर खासतौर से मंदबुद्धि बालक और किशोरवय के लिए ही स्थापित है। यहां पर विशेषज्ञ मौजूद हैं। वरिष्ठ मनोरोग व मानसिक चिकित्सक भी सेंटर में रह रहे बच्चों व किशोरों के इलाज के लिए आते हैं।
जिला अस्पताल में भर्ती वन दुर्गा ने सुबह महिला चिकित्साकर्मी के सहयोग से स्नान किया। इसके बाद खाना खाया। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने बताया कि वह पूरी तरह सामान्य है। मोगली गर्ल या जंगली गर्ल कहना उसके साथ अन्याय होगा।
डीएफओ ने मोगली गर्ल को बताया मनगढ़ंत कहानी
अस्पताल में खाना खाती वन दुर्गा
जंगल में मिली किशोरी को लेकर तरह-तरह की अफवाह उड़ रही है। कोई मोगली गर्ल तो कोई रहस्यमयी किशोरी बता रहा है। इस पर से कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के डीएफओ जीपी सिंह ने पर्दा उठा दिया है।
डीएफओ ने बताया कि उन्होंने स्वयं मौके का निरीक्षण किया। जहां पर किशोरी मिली थी, वह आम रास्ता है। 50 मीटर की दूरी पर खपरा वन चौकी स्थित है। 20 जनवरी को किशोरी लहूलुहान हालत में सड़क किनारे पड़ी थी।
कुछ दूरी पर तीन-चार बंदर हमला करने की योजना बना रहे थे। उसी समय खपरा वन चौकी के वाचर गश्त करते हुए निकले। उन्होंने बंदरों को भगाकर किशोरी को सुरक्षित किया। इस दौरान गांव के लोग भी पहुंच गए थे। पुलिस को बुलवाकर किशोरी को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।
डीएफओ ने कहा कि कतर्नियाघाट में हर साल कैमरे लगते हैं। ट्रैपिंग के द्वारा जंगल पर नजर रखी जाती है। इसके अलावा सभी बीटों में वाचर गश्त करते हैं। कोई ऐसा रास्ता नहीं है, जिससे वाचर न निकलते हों।
ऐसे में अगर कई वर्षों तक किशोरी के जंगल में रहने की बात कही जा रही है तो उसे कैमरा ट्रैपिंग में कहीं न कहीं आना चाहिए। या फिर वाचरों की नजर पड़नी चाहिए। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। सिर्फ मनगढ़ंत कहानी बनाकर कुछ लोगों ने वाहवाही लूटने की कोशिश की है।
चोट के कारण किशोरी चल नहीं पा रही थी। लग रहा था कि किसी ने पिटाई कर उसे फेंका है। डीएफओ ने बताया कि इस मामले में उच्चाधिकारियों को भी पत्र लिखकर अवगत करा दिया है।