लखनऊ। गोंडा के रहने वाले युवक की दोनों किडनी फेल हो चुकी थी। लंबे समय से वह किडनी ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहा था। कोई भी डोनर उसे नहीं मिल पा रहा था। बेटे की जिन्दगी बचाने के लिए मां ने अपनी किडनी देने का फैसला किया। कई जांच पड़ताल बाद मंगलवार को लोहिया संस्थान के यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने किडनी ट्रांसप्लांट किया। निदेशक का कहना है कि मरीज-डोनर की हालत सामान्य है।
गोंडा में निवासी 25 वर्षीय युवक को बीते वर्ष पेशाब करते समय जलन महसूस होने लगी। कुछ समय में ही उसे पेट में तेज दर्द शुरू हो गया। परेशान परिवारीजनों ने अमित को 2 जुलाई 2018 में राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लेकर आए। नेफ्रोलॉजी विभाग में मरीज की जांच पड़ताल हुई। जांच में उसकी दोनों किडनी फेल होने की बात सामने आई। डॉक्टरों ने 6 जुलाई को मरीज को भर्ती कर लिया। हालत अधिक खराब होने के कारण उसकी डायलिसिस करनी पड़ी। डॉक्टर ने बताया कि जान बचाने के लिए अमित का किडनी ट्रांसप्लांट करना होगा। परिवार वाले डोनर तलाशने लगे। समय के साथ युवक की तबीयत बिगड़ रही थी, ऐसे में उसकी मां ने अपनी एक किडनी देना का फैसला लिया।
मां की किडनी दिए जाने की स्वीकृति देने पर डाक्टरों ने ब्लड व टिश्यू का मिलान करना शुरू कर दिया। युवक और उसकी मां का ब्लड ग्रुप समान था। इसके कारण यह ट्रांसप्लांट आसान हो गया। मंगलवार को यूरोलॉजी और नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने दूरबीन विधि से मरीज का किडनी ट्रांसप्लांट कर दिया। नेफ्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अभिलाष के नेतृत्व में चली यह सर्जरी करीब पांच घंटे में पूरी हुई। डॉ. अभिलाष ने बताया कि सर्जरी के बाद मां व बेटे की हालत में सुधार है। निदेशक प्रो. एके त्रिपाठी ने ट्रांसप्लांट करने वाली टीम को बधाई दी।
उच्चरक्तचाप से खराब हुई थी किडनी
डॉ. अभिलाष ने बताया कि जांच में पता चला कि युवक की दोनों की किनडी आसामान्य थीं। यही कारण था कि अमित का ब्लड प्रेशर हमेशा हाई रहता था। किडनी खराब होने की एक वजह यह भी रही। बीपी हाई होने पर किडनी के खराब होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। अमित के केस में भी ऐसा ही हुआ। ट्रांसप्लांट के इंतजार में मरीज का माह तक डायलिसिस किया गया।
इन्होंने किया ट्रांसप्लांट
ट्रांसप्लांट करने वाले डाक्टरों की टीम में डॉ. ईश्वर, डॉ. आलोक, डॉ. संजीत, डॉ. अभिलाष, डॉ. नमृता, डॉ. दीपक मालवीय, डॉ. सीके पांडेय, डॉ. पीके दास और ओटी टेक्नीशियन अवधेश शामिल रहे।