अब किसी भी बच्चे को, किसी भी कारण से मां के दूध से वंचित नहीं रहना पड़ेगा। यह संभव होगा केजीएमयू में बनने वाले प्रदेश के पहले मदर मिल्क बैंक की बदौलत। यह दूध बैंक ट्रॉमा सेंटर के पांचवें तल पर बनाया जाएगा। इसे शुरू करने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए केजीएमयू अफसरों के साथ एनएचएम व सहयोगी संस्था के अधिकारियों ने निरीक्षण किया। तय हुआ है कि एनआईसीयू वार्ड में एक और क्वीन मेरी में दो मिल्क कलेक्शन सेंटर बनाए जाएंगे।
वीसी प्रो. एमएलबी भट्ट ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में बनने वाला मिल्क बैंक सेंटर फॉर एक्सीलेंस होगा। यहां काउंसलर प्रसूताओं को स्तनपान के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इसका फायदा शिशु मृत्युदर में कमी के रूप में सामने आएगा। मां के दूध में विभिन्न तरह के पोषक पदार्थ होते हैं, जो नवजातों को विभिन्न बीमारियों व संक्रमण से भी बचाते हैं। ऐसी गुणवत्ता डिब्बाबंद दूध मे नहीं होती है। प्रो. भट्ट ने बताया कि मदर मिल्क बैंक बनाने में एनएचएम और उसकी सहयोगी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाएगा। आशा और एएनएम की मदद से गांव-गांव तक यह बात पहुंचाई जाएगी कि मां का दूध शिशु के लिए कितना जरूरी है। इसमें अच्छा काम करने वाली इकाइयों को सम्मानित भी किया जाएगा।
सेंटर निर्माण को लेकर केजीएमयू प्रशासनिक भवन में एक बैठक भी हुई। इसमें पीडियाट्रिक की विभागाध्यक्ष प्रो. रश्मि कुमार, माइक्रोबायोलॉजी की विभागाध्यक्ष प्रो. अमिता जैन, प्रो. माला कुमार एवं स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग से प्रो. अंजु अग्रवाल व पीजीआई से प्रो. एमएम गोडबोले व समेत निजी संस्था के पदाधिकारी मौजूद रहे।