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परदेस से लौटे प्रवासियों का पूर्वांचल और अवध में सबसे अधिक दबाव, रोजगार और उद्योग की बड़ी कमी

Tue, 23 Jun 2020 11:12 AM IST
शाहरुख खान महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रवासी मजदूर (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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लॉकडाउन के बाद दूसरे प्रदेशों से लौटे प्रवासियों का सबसे अधिक दबाव पूर्वांचल और अवध के जिलों में है। पहले से ही पिछड़ेपन और तंगहाली के शिकार पूर्वांचल के जिलों में इस अतिरिक्त वर्क फोर्स ने चुनौती बढ़ा दी है। 
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प्रदेश सरकार ने प्रवासी श्रमिकों की जिला स्तर पर स्किल मैपिंग कराई है। मसलन, श्रमिक कहां से आया है? वहां उसका काम क्या था? वह स्किल्ड लेबर है या अनस्किल्ड? किस काम में दक्षता है? रोजगार का इच्छुक है या नहीं? महिला-पुरुष, ट्रांसजेंडर और 18 वर्ष से कम के बच्चों की भी सूचना जुटाई जा रही है। 

21 जून तक 35.38 लाख से अधिक श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। इनमें गोंडा व बहराइच सहित 10 जिले ऐसे हैं जहां एक लाख से भी अधिक लोग आए हैं। जौनपुर, सिद्धार्थनगर व आजमगढ़ में तो यह आंकड़ा दो लाख पार कर गया है। 15 जिले ऐसे हैं जहां 1 लाख से कम लेकिन 50 हजार से अधिक प्रवासी हैं। रोजगार की जरूरत इन्हीं 25 जिलों में अधिक है।     
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पूर्वांचल में प्रदेश के एक तिहाई से ज्यादा जिले, अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी चौथाई 
प्रदेश के 75 में से 28 जिलों को मिलाकर पूर्वांचल के रूप में चिह्नित किया गया है। इनमें ज्यादातर अवध के जिले हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार पूर्वांचल में राज्य की जनसंख्या के 40.23 प्रतिशत लोग रहते हैं, लेकिन सकल जिला घरेलू उत्पाद के अनुमानों में राज्य की अर्थव्यवस्था में पूर्वांचल का योगदान 26.77 प्रतिशत (वर्ष 2028-19 (अनंतिम) ही है। 
 

बड़े उद्योग-धंधों की कमी

पश्चिमांचल में गाजियाबाद, नोएडा व ग्रेटर नोएडा रोजगार का बड़ा केंद्र हैं, लेकिन अवध व पूर्वांचल में ऐसे उद्योग-धंधे न के बराबर हैं। यहां कुछ जिलों में उद्योग के रूप में चीनी मिले हैं। जहां अधिकतम कार्य सीजनल है। अब चीनी मिलें बंद हैं। फिर अतिरिक्त वर्क फोर्स खपाने की गुंजाइश न के बराबर है। इसी तरह पर्यटन, लघु उद्योग व हस्तशिल्प स्थानीय रोजगार के बड़े साधन हैं, लेकिन महामारी से पर्यटन सेक्टर पर बुरा असर पड़ा है। ऐसे में इन क्षेत्रों की वर्क फोर्स को काम देना चुनौती है।      

समस्या का स्थायी समाधान नहीं मनरेगा  
केंद्र सरकार ने अधिक संख्या में लौटे प्रवासी श्रमिकों वाले देश के 116 जिलों में 125 दिन के लिए गरीब कल्याण रोजगार अभियान शुरू किया है। इनमें ज्यादातर कार्य मनरेगा से जुड़े हैं। इन जिलों में यूपी के 31 जिले शामिल हैं। इसके दायरे में पूर्वांचल के लगभग सभी जिले हैं। लेकिन, काफी संख्या में श्रमिक मनरेगा में भागीदारी नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें अपने हुनर के मुताबिक काम की दरकार है। उनके मन में सवाल है कि 125 दिन बाद क्या होगा? विशेषज्ञों का कहना है कि मनरेगा रोजगार का कोई स्थायी इलाज नहीं है।

पश्चिम में कम पलायन
पश्चिम में रोजगार के अधिक अवसर हैं तो वहां बाहर से लौटने वाले प्रवासी श्रमिकों की संख्या पूर्व की अपेक्षा बहुत कम है। सबसे कम गाजियाबाद में हैं, जहां 424 प्रवासी ही आए हैं। अब तक पंजीकरण में 5000 से कम प्रवासियों के लौटने वाले जो 10 जिले हैं, उनमें बुंदेलखंड के ललितपुर को छोड़कर सभी जिले पश्चिमी यूपी के ही हैं। 

गाजियाबाद व गौतमबुद्धनगर इंजीनियरिंग व मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों का बड़ा सेंटर है तो मेरठ में स्पोर्ट्स, एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के साथ एमएसएमई की तमाम इकाइयां हैं। मथुरा में पर्यटन के अलावा स्वच्छता संबंधी सैनिटरी-फिटिंग्स के टैक्स एंड कॉक्स का उत्पादन होता है। 

हापुड़ व बागपत में पर्दे, किचन टॉवेल, टेबल कवर व कुशन व प्रिंटिंग बेडशीट आदि का बड़ा कारोबार है। शामली में रिम व एक्सेल प्रोडक्ट तो ललितपुर में जरी व सिल्क साड़ियों से रोजगार मिलता है। मुरादाबाद में धातु शिल्प तो हाथरस में हींग प्रसंस्करण का कारोबार है।

आश्रय स्थल, ट्रांजिट हास्टल व होम क्वारंटीन में शामिल 35 लाख से अधिक श्रमिकों में से 34 लाख की स्किल मैपिंग का काम पूरा हो गया है। इनमें 27.63 लाख पुरुष, 2.87 लाख महिलाएं और 1397 ट्रांसजेंडर हैं। इनके अलावा  3.47 लाख से अधिक 18 वर्ष से कम उम्र वाले बच्चे हैं।   

राजधानी में 13 हजार से ज्यादा प्रवासी लौटे 
राजधानी लखनऊ भी उन जिलों में शामिल है जहां 10 हजार से ज्यादा प्रवासी श्रमिक लौटें हैं। यहां 13,451 लोग दूसरे शहरों से  लौटे हैं। आगरा में 12271, कानपुर नगर में 25678, बरेली में 20731 और अलीगढ़ में 9212 प्रवासी श्रमिक आए हैं।    

इन जिलों में 5000 से कम प्रवासी श्रमिक लौटे
गाजियाबाद-424  बागपत-1264  हापुड़- 2062  शामली-2413  मथुरा-2653  मेरठ- 2939  गौतमबुद्धनगर - 4032  ललितपुर-4184  मुरादाबाद-4264  हाथरस-4562  
एक लाख से अधिक प्रवासी वाले जिले    
जौनपुर 269358, सिद्धार्थनगर 228792, आजमगढ़ 200873,  प्रयागराज 141759, गोरखपुर 140285,  संतकबीरनगर 125941,  गोंडा 116977  बहराइच 104434,  महराजगंज 107881,  बलिया 100389  
1 लाख से कम, लेकिन 50 हजार      से अधिक वाले जिले 
बलरामपुर 89344,  बस्ती 89538,  हरदोई 86641,  सीतापुर 80568,  देवरिया 75151,  सुल्तानपुर 70226,  सहारनपुर 67995, प्रतापगढ़  65930, अंबेडकरनगर 52970,   अयोध्या 61943,  गाजीपुर 55806,  बांदा 56816,  कुशीनगर 65438,  वाराणसी 50721,लखीमपुर खीरी  60533  

आश्रय स्थल से आए श्रमिक     1598676  
ट्रांजिट स्थल में आए श्रमिक    990824  
होम क्वारंटीन में आए श्रमिक     948521 
कुल श्रमिकों की संख्या    35,38,021
(नोट-ये आंकड़े 21 जून तक के हैं। अभी रजिस्ट्रेशन जारी है।) 
 
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सरकार ने श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए हैं

बड़ी संख्या में श्रमिकों के पलायन की समस्या पहली बार सामने आई है। केंद्र की मोदी व राज्य की योगी सरकार ने श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए हैं। जिन जिलों में बहुत अधिक संख्या में श्रमिक लौटे हैं, यदि वहां सभी को रोजगार उपलब्ध कराने में मुश्किल होगी तो नजदीकी जिलों में रोजगार दिलाने का प्रयास होगा।

ऐसे जिलों की स्थिति पर विशेष रूप से गौर करने के लिए मुख्यमंत्री से आग्रह किया जाएगा। वहां की स्थिति को ध्यान में रखकर जरूरी कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वांचल के औद्योगीकरण को लेकर कई महत्वपूर्ण पहल की है। -सतीश महाना, औद्योगिक विकास मंत्री एवं उपाध्यक्ष, यूपी कामगार और श्रमिक (सेवायोजन एवं रोजगार) आयोग 
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