मास्टर प्लान 2031 में शामिल इस सेक्शन में कहा गया है कि गोमती नदी के किनारे बंधा का निर्माण प्रस्तावित है। इस प्रस्तावित बंधे के अलाइनमेंट के बाहर के क्षेत्र में सक्रिय भू-उपयोग प्रस्तावित किए गए हैं। बंधे के निर्माण के समय इसके अलाइनमेंट में परिवर्तन की संभावना है।
ऐसे में बंधे के अलाइनमेंट की 200 मीटर की परिधि में प्रस्तावित भू-उपयोग तभी प्रभावी होंगे जब बंधे का निर्माण कर लिया जाए। आशय यह है कि यदि भविष्य में किसी वजह से ही अलाइनमेंट में परिवर्तन करना पड़े तो ऐसे समय में जगह की जरूरत होगी। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए ही जमीन रिजर्व रखी जाती है। यही वजह है कि यहां पर होटल निर्माण अनुमति नहीं दी जा सकती।
वीसी प्रभु एन सिंह ने होटल कंपनी को यह भी प्रस्ताव दिया है कि अगर निवेशक इच्छुक है तो वे गोमतीनगर विस्तार के सेक्टर-4 में प्रस्तावित स्थल के नजदीक ही सात भूखंड 4/5, 4/18, 4/4ए, 4/6, 4/33, 4/33ए, 4/35 में इच्छानुसार खरीदकर होटल का निर्माण किया जा सकता है।
एलडीए के मुख्य नगर नियोजक की रिपोर्ट के मुताबिक, होटल की साइट प्रस्तावित बंधे से 200 मीटर की परिधि के अंदर है। बंधे का निर्माण अभी नहीं किया गया है। ऐसे में यहां मास्टर प्लान-2031 का सेक्शन 7.2.14 लागू होगा। इसके बाद मानचित्र सेल ने होटल के निर्माण के लिए अनुमति के आवेदन को निरस्त किया।
खुद वीसी प्रभु एन सिंह का कहना है कि वहां पूर्व से प्रस्तावित प्रोजेक्ट में क्रि केट स्टेडियम 200 मीटर की परिधि के बाहर है। वहीं शिप्रा स्टेट की इंटीग्रेटिड टाउनशिप की डीपीआर या तलपट मानचित्र को स्वीकृति नहीं दी गई है। टाउनशिप के मानचित्र को स्वीकृति मास्टर प्लान के अनुसार ही दी जाएगी।