प्राइमरी टीचरों की भर्ती प्रक्रिया पूरी होते ही स्कूलों में शिक्षकों की संख्या खाली पद से भी ज्यादा हो जाएगी। बेसिक शिक्षा परिषद से यह जानकारी मिलने के बाद शासन में खलबली है।
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परिषद के मुताबिक मेरठ और गाजियाबाद जैसे कई जिलों के प्राइमरी स्कूलों में तो शिक्षक के एक भी पद खाली नहीं हैं।
परिषद की चिट्ठी-पत्री के बाद शासन प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती के फॉर्मूले पर नए सिरे से विचार करने में जुट गया है।
दूसरे चरण में शिक्षा मित्रों के समायोजन पर भी नए सिरे से विचार हो रहा है ताकि तैनाती के बाद शिक्षकों को वेतन के लाले न पड़ें।
प्रदेश में प्राइमरी स्कूलों की संख्या 1,12,754 है
सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता ने परिषद के सचिव संजय सिन्हा से प्राइमरी स्कूलों में सृजित पद के आधार पर तैनात और रिक्त पदों का ब्यौरा मांगा था।
परिषद के सचिव ने शासन को 2011 तक स्वीकृत पद के आधार पर तैनात, रिक्त और चल रही भर्ती प्रक्रिया का ब्यौरा शासन को उपलब्ध कराया है।
इसमें प्राइमरी स्कूलों की संख्या 1,12,754 बताई गई है। इसमें प्राइमरी स्कूलों में सहायक व प्रधानाध्यापक के कुल 3,89,269 पद बताए गए हैं।
इसमें से 1,69,591 कार्यरत और 2,19,678 खाली बताए गए हैं। जून 2015 में प्राइमरी स्कूलों में 3053 प्रधानाध्यापक व 523 सहायक अध्यापक रिटायर हो जाएंगे। इस हिसाब से शिक्षकों के 2,23,254 पद खाली हो जाएंगे।
20,065 सहायक अध्यापक अधिक होंगे
परिषद से भेजे गए ब्यौरे में बताया गया है कि 10,000 बीटीसी अभ्यर्थियों की भर्ती प्रक्रिया में 5,030 व पहले चरण में 58,464 शिक्षा मित्र सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किए जा चुके हैं।
मौजूदा समय 15,000 बीटीसी पास अभ्यर्थियों, 72,825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। दूसरे चरण में 92,000 शिक्षा मित्रों के समायोजन का कार्यक्रम जल्द जारी किया जाना है।
इन सभी भर्तियों को यदि जोड़ लिया जाए तो यह संख्या 2,43,319 तक पहुंच जाती है। विभाग के पास मौजूदा समय खाली पदों की संख्या 2,23,254 बताई गई है। इस हिसाब से देखा जाए तो 20,065 सहायक अध्यापकों की तैनाती अधिक हो जाएगी।
प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हो चुका है। इसके मुताबिक प्राइमरी में 30 बच्चों पर एक और उच्च प्राइमरी में 35 पर एक शिक्षक का मानक तय किया गया है।
बेसिक शिक्षा परिषद ने शासन को वर्ष 2011 की रिक्तियों के आधार पर पदों का ब्यौरा भेजा है।
इसके आधार पर देखा जाए तो बेसिक शिक्षा परिषद को प्राइमरी में सहायक व प्रधानाध्यापक के पदों का नए सिरे से सृजन कराने की जरूरत है।