लखनऊ में सैंपलों की संख्या बढ़ने के दूसरे या तीसरे दिन मरीजों का ग्राफ भी बढ़ जाता है। वहीं, मरीजों की संख्या बढ़ी तो दूसरे दिन स्वास्थ्य विभाग सैंपल लेने की गति धीमी कर देता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े तो इसी ओर इशारा कर रहे हैं।
राजधानी में 13 अप्रैल से 13 मई के बीच करीब 5600 सैंपल लिए गए। अब तक 193 मरीज मिल चुके हैं, जिनमें 48 जमाती हैं। 11 मार्च को कनाडा से लौटी डॉक्टर के पॉजिटिव मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने सैंपल लेने शुरू किए।
31 मार्च तक यह आंकड़ा औसतन 20 से कम ही रहा। एक अप्रैल को सदर में जमातियों के मिलने के बाद 50 के सैंपल लिए गए। इनकी रिपोर्ट दो अप्रैल को आई तो 21 पॉजिटिव मिले।
इसके बाद सैंपल का आंकड़ा 50 के आसपास रहा व मरीजों की संख्या भी सीमित रही। 12 अप्रैल को 80 सैंपल लिए तो अगले दिन में 9 मरीज पॉजिटिव मिले। 14 अप्रैल को 160 सैंपल लिए गए तो दूसरे दिन मरीजों की संख्या 31 हो गई।
13 मई को पॉजिटिव मरीजों की संख्या निकली 13
15 अप्रैल को 150 सैंपल में 25 पॉजिटिव मिले , 17 अप्रैल को 197 सैंपल लिए गए तो 18 को मरीजों की संख्या 55 हो गई। इसके बाद कुछ दिन तक सैंपल का आंकड़ा ढाई सौ के आसपास रहा।
हालांकि, मरीजों की संख्या में खास इजाफा नहीं हुआ। 23 अप्रैल को लिए गए 285 सैंपलों की रिपोर्ट 24 को आई तो 18 पॉजिटिव मरीज निकले। इसके बाद सैंपल का आंकड़ा घटकर डेढ़ सौ के आसपास रहा और कभी दो तो कभी चार पॉजिटिव मरीज मिलते रहे। 6 मई को सिर्फ 90 सैंपल लिए गए तो सात को एक भी पॉजिटिव नहीं मिला।
8 मई को 110 सैंपल लिए गए तो 9 को सिर्फ एक पॉजिटिव मिला। 11 मई को 308 सैंपल लिए गए और 12 को पांच पॉजिटिव मिले। इनमें 203 सैंपल कैसरबाग इलाके के थे।
13 मई को आई रिपोर्ट मेें पॉजिटिव मरीजों की संख्या 13 निकली। इस तरह देखा जाए तो स्वास्थ्य विभाग एक बार पॉजिटिव मरीज की संख्या बढ़ते ही सैंपल की संख्या घटा देता है। ऐसे में दो-तीन दिन पॉजिटिव मरीजों की संख्या भी कम रहती है।
ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच की जरूरत
सैंपलिंग पर जोर
पॉजिटिव मरीजों की संख्या अधिक होने पर परिवार और पड़ोस के लोगों का भी सैंपल लिया। ऐसे में नमूनों की संख्या खुद बढ़ जाती है। विभाग की ओर से प्रयास किया जाता है कि ज्यादा से ज्यादा सैंपल लिए जाएं। - डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ
कोरोना से निपटने को पॉकेट के हिसाब से लॉकडाउन में ढील देने की जरूरत है। यदि पॉजिटिव मरीजों की स्थिति जननी है तो कम्युनिटी सैंपलिंग करानी होगी। जब सैंपल ही कम लिए जाएंगे तो संख्या अपने आप कम रहेगी। लोगों को वायरस से बचने के बारे में ट्रेनिंग देने की जरूरत है। सिर्फ लॉकडाउन से समस्या का समाधान नहीं होगा। - डॉ. टीएन ढोल, पूर्व विभागाध्यक्ष माइक्रोबायोलॉजी, एसजीपीजीआई