मो. मुदस्सिर
मलिहाबाद। मलिहाबाद की मशहूर दशहरी आम तौर पर अपनी मिठास और खुशबू के लिए पहचानी जाती है, लेकिन इस बार मानसून की देरी ने उसके जायके पर असर डाल दिया है। डाल की पकी दशहरी के मंडियों में पहुंचने से आम प्रेमियों का इंतजार तो खत्म हुआ है, लेकिन स्वाद में आई कमी उन्हें निराश कर रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक समय पर बारिश न होने से दशहरी में वह मिठास विकसित नहीं हो सकी, जिसके लिए यह देश-दुनिया में मशहूर है।
मंडी में इस समय डाल की पकी दशहरी 25 से 30 रुपये प्रति किलो के थोक भाव से बिक रही है, जो शुरुआती दौर में सामान्य कीमतों से 10 से 15 रुपये कम है। आम के शौकीनों को एक जून से डाल की पकी दशहरी का इंतजार रहता है और 15 से 20 जून तक यह मंडियों में प्रमुखता से दिखाई देने लगती है। हालांकि इस बार मानसून की देरी का असर स्वाद के साथ-साथ फसल पर भी देखने को मिल रहा है।
किसान मुबीन बताते हैं कि बारिश न होने से मंडियों में आम बेचने में ज्यादा समय लग रहा है। जो दशहरी इस समय 40 रुपये प्रति किलो से अधिक बिकती थी, उसे व्यापारी कम दामों में खरीद रहे हैं। जमीन में नमी न होने से पेड़ों से गिरने वाले पके आम पिचक जाते हैं और गर्मी के कारण जल्दी खराब होने लगते हैं। ऐसे फलों को औने-पौने दामों में बेचना पड़ रहा है।
इस समय एक सिंचाई अवश्य करें
लखनऊ कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश कुमार दुबे के अनुसार मानसून में देरी की वजह से पकी दशहरी में मिठास के साथ हल्का खट्टापन महसूस हो रहा है। साथ ही फलों के समुचित विकास में भी समस्या आ रही है। उन्होंने बागवानों को सलाह दी है कि बची हुई फसल को लाभ पहुंचाने के लिए इस समय एक सिंचाई अवश्य कर दें।
मानसून आने तक रुखसत हो जाएगी दशहरी मलिहाबाद फल पट्टी में 20 मई से दशहरी की तुड़ाई शुरू हो जाती है, जिसका कच्चा आम कई राज्यों में भेजा जाता है। वर्तमान में 22 जून तक क्षेत्र की लगभग 75 प्रतिशत दशहरी समाप्त हो चुकी है। तुड़ाई की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए अगले 15 से 20 दिनों में दशहरी पूरी तरह बाजार से विदा हो सकती है। बागवानों का कहना है कि डाल की पकी दशहरी की तुलना में कच्चा आम अधिक मुनाफा दे रहा है।
दूसरी किस्मों की ओर बढ़ रहा रुझान
दशहरी आम प्रेमियों की पहली पसंद मानी जाती है, लेकिन इस बार स्वाद और कीमत दोनों को देखते हुए उपभोक्ता दूसरी किस्मों की ओर भी रुख कर रहे हैं। हुस्न आरा, बंबइया, जौहरी, लंगड़ा, आम्रपाली और सुर्खा जैसी किस्में लोगों की पसंद बन रही हैं।