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UP: विदेशियों को इंटरनेट स्पीड मुहैया कराने के नाम पर ठगी करने वालों पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज

Tue, 05 Dec 2023 11:47 AM IST
ishwar ashish अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

विदेशियों से ठगी करने के मामले में गोरखपुर के साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की जांच ईडी करेगी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : iStock
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विस्तार
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इंटरनेट की स्पीड बढ़ाने का झांसा देकर विदेशियों के बैंक खाते साफ करने वाले साइबर जालसाजों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है। ईडी ने गोरखपुर के साइबर क्राइम थाने में सितंबर में दर्ज एफआईआर के आधार पर केस दर्ज करके जांच शुरू की है।

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सूत्रों के मुताबिक गोरखपुर निवासी श्याम गुप्ता ने बीती 17 सितंबर को साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि वह बेतिहाता स्थित ज्यूबिलेट इंफो प्रा. लि. में कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव का काम करता था। इस दौरान पता चला कि कंपनी घोटाला कर रही है। कंपनी द्वारा दी गई ट्रेनिंग के मुताबिक उसे अपनी पहचान विदेशी बतानी थी। विदेशियों के बातचीत के दौरान बीटी ओपनरीच नामक कंपनी का इंटरनेट स्पीड टेस्ट कराया जाता था।

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स्पीड कम होने पर जब कस्टमर उसे बढ़ाने को कहता था तो कंपनी के सुपरवाइजर कादिर, राहुल व धीरज आदि को कॉल ट्रांसफर की जाती थी। इसके बाद वे विदेशियों से अनीडेस्क एप डाउनलोड कराते थे। इसके जरिए विदेशियों के बैंक खातों तक पहुंच बनाकर उसमें जमा रकम निकाल लेते थे। कंपनी अपने कर्मचारियों को वेतन नकद देती थी।
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श्याम गुप्ता की शिकायत पर साइबर क्राइम थाने में कंपनी के संचालक अनिक दत्ता, आकाश गुप्ता, आदित्य मिश्रा और पांच सुपरवाइजर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। अब ईडी ने मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज कर कंपनी के संचालकों को तलाश रहा है।

आतंकी भी करते हैं इस्तेमाल
अनीडेस्क एप का इस्तेमाल कई आतंकी संगठन भी करते हैं। यूपी एटीएस की जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है। इस एप्लीकेशन का इस्तेमाल आतंकी संगठन के सदस्य आपस में बातचीत और टेरर फंडिंग के लिए करते हैं। यह प्लेटफॉर्म स्वतंत्र रिमोट एक्सेस प्रदान करने की वजह से जांच एजेंसियों की नजरों में नहीं आता है। इसके जरिए दूसरे इलेक्ट्रानिक डिवाइस को दूर बैठे संचालित भी किया जा सकता है।

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