इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में सदस्यों की बोली तीन करोड़ रुपये तक जा पहुंची। चुनाव में मतदान करने वाले सदस्यों ने जहां जैसा जुगाड़ लगा, वहां माल बटोरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कहीं तो 25 लाख रुपये में ही मामला पट गया। पर, कहीं वोट की कीमत तीन करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
अध्यक्षी की कुर्सी हासिल करने के लिए उम्मीदवारों ने पानी की तरह पैसा बहाया। दिलचस्प यह भी कि कुछ जगह तो वोट देने वालों ने दोनों पक्षों से माल घसीटा और वोट अपने समीकरण के हिसाब से किया।
राज्य निर्वाचन आयोग के पास सदस्यों के खरीद-फरोख्त की मौखिक शिकायतें तो पहुंची, लेकिन कोई लिखित शिकायत न मिलने की वजह से उससे हाथ भी बंधे रहे।
पूर्वांचल में 25 से 50 लाख तक की बोली लगी
यूं तो जिपं अध्यक्ष चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही सभी दलों ने अपने गोटें बिछानी शुरू कर दी थीं, लेकिन सत्तारूढ़ सपा सब पर भारी पड़ी। नामांकन के पहले ही अध्यक्षी के दावेदारों ने ‘ऑफर’ देना शुरू कर दिया था।
जिसने खजाने का जितना मुंह खोला, उतने ही ज्यादा सदस्य उनके पाले में खड़े हो गए। पैसे के आगे दलीय प्रतिबद्धताएं, नाते-रिश्तेदारी, निजी संबंध धरे रह गए। पूर्वांचल में 25 से 50 लाख तक की बोली लगी तो पश्चिमी यूपी में तीन करोड़ तक।
चर्चाओं की मानें तो नामांकन से नाम वापसी के बीच खरीद-फरोख्त का सिलसिला चोरी-छिपे चलता रहा। अमेठी में सपा प्रत्याशी के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ करने के लिए कांग्रेस समर्थित सदस्यों को 25-25 लाख दिए जाने की चर्चा रही तो सुल्तानपुर, गोंडा, बलरामपुर, गोरखपुर, बस्ती, संतकबीरनगर में भी 25 से 50 लाख तक की बोली लगने की चर्चाएं रहीं।
राज्य निर्वाचन आयोग बोला, हम कुछ नहीं कर सकते
दूसरी तरफ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, मेरठ, मुजफ्फनरगर, सहारनपुर, बिजनौर तथा आसपास के जिलों में सदस्यों की बोली एक से तीन करोड़ रुपये तक लगाए जाने की चर्चा है। जानकारों की मानें तो शामली में सर्वाधिक तीन करोड़ में सदस्य बिके। सारा लेन-देन पर्दे के पीछे होता रहा।
मामले पर राज्य निर्वाचन आयुक्त सतीश कुमार अग्रवाल ने कहा ‘जिपं अध्यक्ष चुनाव में कहीं से एक करोड़, कहीं दो तो कहीं तीन करोड़ रुपये देने की सूचनाएं मिल तो रही थीं, लेकिन किसी ने लिखित शिकायत नहीं की। आयोग की भूमिका तब शुरू होती है, जब उसके पास लिखित शिकायत आए। इसलिए इसका संज्ञान नहीं लिया जा सकता था। ये अफवाहें भी हो सकती हैं।’